दुबई में इंजिनियर बेटे की मौत, शव के लिए दर-दर भटक रहा परिवार



  • प्रतापगढ़ के रहने वाले इंजिनियर संदीप की दुबई में हार्ट अटैक से मौत

  • परिजन संदीप के शव को वापस लाने के लिए मंत्रालयों से लगा रहे गुहार

  • पीएमओ और गृह मंत्रालय से मांगी मदद, अभी तक नहीं मिली कोई सहायता


प्रतापगढ़। दुबई में हार्ट अटैक से इंजिनियर बेटे की मौत के बाद परिजन उसके शव की लाने की मांग को लेकर दर-दर भटक रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा कोतवाली से टिकुरी दशरथपुर गांव में 20 अप्रैल को बेटे संदीप पाण्डेय की मौत के बाद गम में डूबे परिवार को ढांढस बंधाने के लिए ग्रामीण के अलावा लॉकडाउन में लाठी-डंडा सहते रिश्तेदार भी पहुंच रहे हैं। दुबई से बेटे का शव लाने के लिए दर-दर भटक रहा परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसंपर्क कार्यालय भी किसी तरह पहुंचा लेकिन बंद होने के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। मामला प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर कुण्डा कोतवाली के टिकुरी दसरथपुर गांव का है। घर का इकलौता कमाने वाला संदीप दुबई में एक निजी कंपनी में इंजिनियर के पद पर था। उसके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार की गृहस्थी की गाड़ी खींचने वाले इंजिनियर बेटे संदीप की मौत की सूचना दुबई से आते ही घर मे कोहराम मच गया तो वहीं मृतक की मां बेटे के गम में बेसुध हो गई है। पैंतीस वर्षीय संदीप की तीस वर्षीय पत्नी पर यह खबर वज्रपात जैसा है। वह अर्धविक्षिप्त स्थिति में पड़ी है। मां बेटे का अंतिम दर्शन करने के लिए बेचैन है। इंजिनियर बेटे की मौत को एक सप्ताह से अधिक हो गए हैं लेकिन दुबई से शव लाने के लिए परिजन जिला प्रशासन की चौखट पर चक्कर लगा रहे हैं।
गृह मंत्रालय से गुहार
संदीप के चचेरे भाई अखिलेश पाण्डेय ही भागदौड़ कर रहे हैं लेकिन कोरोना के कारण लॉकडाउन में उनका शव भारत वापस लाने में जिला प्रशासन की कोई दिलचस्पी नजर नहीं आ रही है। प्रशासन का दावा है कि संदीप का शव देने को दुबई की सरकार तैयार है, लेकिन उसके लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय की अनुमति चाहिए। गांव में रह रहा परिवार गृह मंत्रालय से गुहार लगा रहा है कि वह एनओसी देकर शव को भारत लाने में मदद करे।
अधिकारियों ने साधी चुप्पी
संदीप के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। वह अपने घर का इकलौता चिराग था जो अपने पीछे दो मासूम बेटियों साधिका और कुट्टी को छोड़ गया है। इस बाबत प्रशासन के आला अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई लेकिन कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब पूरे देश में कोरोना महामारी के चलते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पूरी तरह से बंद हैं तो भारत सरकार संदीप के शव को लाने की पहल करेगी या नहीं।