बुजुर्ग महिला की हत्या कर गार्ड ने दोस्तों के साथ की लूटपाट


नई दिल्ली। बुजुर्ग महिला की हत्या के मामले में आरोपी गार्ड ने तीन दिन पहले ही लूटपाट का प्लान बनाया था। गार्ड बुजुर्ग दंपती के छोटे मोटे काम कर देता था और ऐसे ही एक काम के सिलसिले में तीन दिन पहले वह दंपती के घर गया था। आरोपी ने पुलिस को बताया कि जब वह घर गया तो उसने देखा कि महिला अलमारी का सामान इधर उधर कर रही थी, जिसके बाद ही उसके दिमाग मे लूटपाट का विचार आया। घर में कोई आता जाता भी नहीं था। इसके बाद उसने लूटपाट की साज़िश रची। उसने अपने दो और नेपाली दोस्तों को शामिल किया। उनकी प्लानिंग थी कि लूटपाट के बाद वे लोग नेपाल भाग जाएंगे। पुलिस के मुताबिक, लूटपाट और हत्या की पूरी वारदात करीब एक घंटे तक चली। शनिवार रात 7:56 बजे 2 आरोपी घर के बाहर आए, जिसके बाद अंदर से आए तीसरे व्यक्ति के साथ वो लोग अंदर चले गए। ये सीसीटीवी कैमरे में कैद है। इसके बाद तीनों आरोपी रात 8:55 बजे घर से बाहर निकले। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी 59 मिनट तक घर के भीतर रहे, जिस दौरान उन्होंने पहले बुजुर्ग महिला की हत्या की और फिर गहने और नकदी लूटने के बाद फरार हो गए। आरोपियों ने महिला के पति के हाथ पैर भी बांधे थे, लेकिन वो इतने हल्के बंधे थे कि अपने आप खुल गए। जिसके कारण पडोसियों के आने पर वो बंधे हुए नहीं मिले। आरोपियों ने उनको बांधकर ही उनके सामने हत्या को अंजाम दिया था। आरोपियों ने करीब 80 हज़ार रुपये और कुछ गहने चुराए थे। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी सफदरजंग एनक्लेव के ही कमल सिनेमा के पास गए, जहां से वो टैक्सी लेकर नेपाल जा रहे थे। हालांकि नेपाल बॉर्डर पर पुलिस के हत्थे चढ़ गए। 
गाड़ी के ड्राइवर ने ही बदमाशों को पकड़वाया
डीसीपी देवेंद्र आर्य के मुताबिक, तकनीकी सर्विलांस से पता चला कि आरोपियों ने गाड़ी बुक की है, क्योंकि सीसीटीवी के ट्रेस मिल गए थे। इसके बाद पुलिस के हाथ गाड़ी का नंबर आ गया और उस नंबर की मदद से ड्राइवर की पूरी डिटेल निकली गई। जब तक एक टीम डिटेल निकाल रही थी, तब तक दूसरी टीम नेपाल बॉर्डर भेजी जा चुकी थी, क्योंकि पुलिस को इनके नेपाली होने का पता था और पूरा यकीन था कि ये नेपाल जाएंगे। इसके बाद पहली टीम ने ड्राइवर से बात की, तो उसने बताया कि सुबह 5 बजे उसने तीनों को लखीमपुर खीरी में छोड़ा है। फिर पुलिस ने लोकल पुलिस की मदद से जाल बिछा दिया और आरोपियों को पकड़ लिया।
बुज़ुर्ग से नहीं हो सकी ज्यादा पूछताछ
पुलिस के मुताबिक, लुटेरों के पास से कुछ माल बरामद किया गया है, लेकिन यह पूरा माल है या नहीं, इस बारे में नहीं पता चला है। क्योंकि पुलिस को बुजुर्ग ने बताया ही नहीं कि उनका क्या-क्या माल चोरी हुआ है। उन्होंने बताया कि बुज़ुर्ग बहुत कम बोलते हैं। वहीं, पत्नी की मौत से वे परेशान भी हैं। इतनी अधिक उम्र होने के कारण पुलिस को उनसे पूछताछ करने में दिक्कत हो रही है। पुलिस बुजुर्ग से उस गार्ड का नाम तक नहीं पता कर पाई थी, जिसने कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया था।
सीनियर सिटीजन सेल में रजिस्टर्ड थे बुजुर्ग दंपती
घर मे घुसकर लूटपाट और हत्या की गुत्थी बेशक पुलिस ने कुछ घंटों में सुलझा ली हो, लेकिन सीनियर सिटीजन सेल की कार्यवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस सेल में रजिस्टर्ड एक बुज़ुर्ग के घर मे 15 दिन तक एक शख्स बिना किसी वेरिफिकेशन के रहता रहा और लोकल पुलिस को इस बारे में पता नहीं था। वहीं, 15 दिन तक पुलिस को इसलिए नहीं पता चला क्योंकि कोई बीट का सिपाही बुज़ुर्ग की खैर खबर लेने ही नहीं गया। जबकि 10 से 15 दिनों के बीच मे सीनियर सिटीजन से मिलकर उनका सुख दुख पूछने का पुलिस दावा करती है।