चीन ने गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हमले का दिया था आदेश: अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट



  • अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में लद्दाख के गलवान घाटी हमले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है

  • रिपोर्ट के मुताबिक चीनी जनरल ने गलवान में भारतीय सैनिकों पर हमले का आदेश दिया था

  • इस हमले में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे और दोनों के बीच तनाव चरम पर पहुंचा

  • सूत्रों ने कहा कि झाओ भारतीय सैनिकों पर हमले के जरिए 'भारत को सबक सीखाना चाहते थे'


वॉशिंगटन। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में गलवान घाटी हमले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन के वरिष्‍ठ जनरल ने अपने सैनिकों को गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हमले का आदेश दिया था। इस हमले में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद से ही भारत और चीन के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गया है। अमेरिकी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चीन के पश्चिमी थियेटर कमांड के प्रमुख जनरल झाओ जोंगकी ने गलवान घाटी हमले को मंजूरी दी थी। जनरल झाओ उन कुछ गिने चुने वरिष्‍ठ जनरल में शामिल हैं जो पीएलए में अभी भी सेवा दे रहे हैं। झाओ ने इससे पहले चेतावनी दी थी कि भारत, अमेरिका और उसके सहयोगियों के शोषण से बचने के लिए चीन को कमजोर नहीं दिखना चाहिए। 
'भारत को सबक सीखाना चाहते थे जनरल झाओ'
झाओ पहले भी भारत के साथ हुए गतिरोध पर अपनी नजर रखते रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि झाओ भारतीय सैनिकों पर हमले के जरिए 'भारत को सबक सीखाना चाहते थे।' अमेरिका की यह खुफिया रिपोर्ट चीन के उस दावे के उलट है जो वह पिछले कुछ दिनों से दावा कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों पर हमला किया था। अमेरिकी रिपोर्ट से यह स्‍पष्‍ट हो जाता है कि चीन इस हमले के जरिए भारत को अपनी ताकत का संदेश देना चाहता था। हालांकि चीन की यह योजना उल्‍टी पड़ गई और इस हिंसक झड़प में उसके 40 से ज्‍यादा सैनिक हताहत हो गए। दरअसल, चीन चाहता था कि इस कार्रवाई के जरिए भारत पर दबाव बनाया जाए ताकि वार्ता की मेज पर भारतीय पक्ष को दबाया जा सके।
'शी जिनपिंग को निश्चित रूप से आदेश के बारे में थी जानकारी'
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की योजना इसलिए भी फेल रही कि भारत अब अमेरिका के पाले में जाता दिख रहा है। अमेरिका लंबे समय से ही भारत पर हुवावे को 5जी का ठेका नहीं देने के लिए दबाव डाल रहा था। इस हमले के बाद अब भारत में लोग बड़ी संख्‍या में चीनी एप टिक टॉक को हटा रहे हैं। सूत्र ने कहा, 'चीन जो चाहता था, उसके ठीक उल्‍टा हुआ। यह चीनी सेना के लिए जीत नहीं है।' खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस खूनी चीनी हमले के फैसले में चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग किस हद तक शामिल थे, इसके बारे में अभी स्‍पष्‍ट नहीं है। उधर, चीनी सेना के विशेषज्ञों का कहना है कि शी जिनपिंग को निश्चित रूप से हमले के आदेशों के बारे में जानकारी होगी। अमेरिका का मानना है कि जनरल झाओ ने इस हमले में मारे गए चीनी सैनिकों की याद में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया था। हालांकि इस बारे में चीनी मीडिया में कुछ भी जानकारी जानबूझकर नहीं दी गई। यही नहीं चीन के सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी इस हार के बारे में काफी आलोचना की गई जिसे बाद में सेंसर कर दिया गया।
वियतनाम युद्ध, डोकलाम में भी फेल हुए थे जनरल झाओ
ऐसा नहीं है कि जनरल झाओ की योजना उल्‍टी पड़ी है। अमेरिकी अनुमान के मुताबिक इससे पहले वर्ष 1979 में वियतनाम युद्ध के दौरान जनरल झाओ पीएलए में थे और माना जाता है कि उनके कुप्रबंधन की वजह से विवाद काफी बढ़ गया था। वर्ष 2017 में डोकलाम विवाद के दौरान भी जनरल झाओ शामिल थे। इस दौरान भारतीय सैनिकों ने सफलतापूर्वक चीनी सैनिकों को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था।