ग्राम प्रधान ने विकलांगों को दिए टैंक विहीन शौचालय


ज्ञान प्रकाश शर्मा,(फर्रुखाबाद)। सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश के हर परिवार को शौचालय उपलब्ध करवाने में कोई कसर नही छोड़ी लेकिन मिशन धरातल पर मानक अनुरूप नही उतरा। शौचालय मानक की शिकायत पर भी प्रशासन से कोई कार्यवाई नही होती जो पूर्ण सत्य हकीकत है। ग्राम प्रधानों की मनमानी पर प्रशासन द्वारा भी कोई लगाम नही लगाई गई। विकास खण्ड राजेपुर की ग्राम पंचायत गुडेरा की नरायन मडैयां में सन 2017/2018 में विधवा नेत्रहीन सुशीला पत्नी चंद्र पाल के लिए सीट व टैंक विहीन शौचालय बनवाया गया। विकलांग राम सेवक जो सही से खड़े भी नही हो पाते उनका शौचालय भी टैंक विहीन । लोगों ने बताया कि विकलांग राम सेवक के टैंक का गड्ढा खोद दिया गया था जिसमें इनकी वृद्ध मां गिर कर मर गईं उसके बावजूद भी टैंक नही बना। राम तीर्थ पुत्र सत्य पाल और  परमेश्वर पुत्र नेत्र राम का शौचालय भी टैंक विहीन । राम किशन पुत्र वंशी लाल आदि लोगों को शौचालय मिले ही नहीं । यहां अधिकतर गलियों में नालियां ही नही बनीं लोग प्रयोग किया हुआ जो गंदा पानी घर के सामने बने एक छोटे से गड्ढे में भरते फिर उसको स्वयं बाल्टी से निकाल के फेंकते । लगे हुए नलों से प्रयोग किया गया गंदा पानी नल के पास ही एक छोटे गड्ढे में एकत्र किया जाता फिर बाद में निकाल कर फेंका जाता। लोगों द्वारा गांव की प्रधान उमा देवी के पति दिग्विजय सिंह से इन समस्याओं का शिकवा किया गया जिस पर प्रधान पति ने कहा कि चाहें जहां जिससे भी शिकायत कर दो कोई कुछ न कर पायेगा । पंचवर्षीय गुजरने तक गांव की दयनीय स्थिति पर खेद का विषय है।