कोरोना वाला ईमेल हो सकता है 'साइबर बम'



  • साइबर अटैक का खतरा, कोविड से जुड़े ईमेल और लिंक्स ध्यान से खोलें

  • सरकारी एजेंसियों ने जारी किया अलर्ट, कहा अनजान ईमेल पर न करें क्लिक

  • साइबर सेल को डर, रविवार से बड़े पैमाने पर हो सकते हैं साइबर अटैक

  • ncov2019@gmail.com जैसी ईमेल से खासतौर पर रहें सावधान


नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बीच अब साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। कोरोना वायरस और अब एलएसी पर तनाव के बीच साइबर अटैक के अलर्ट ने सरकारी ऐजेंसियों की नींद उड़ा दी है। कॉरपोरेट घरानों से लेकर प्राइवेट फर्म और इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले चिंतित हैं। भारत सरकार की इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम यानी (सीईआरटी-इन) की ओर से देशभर में अलर्ट जारी किया गया। जिसमें कहा गया है कि दिल्ली समेत भारत में बड़े पैमाने पर साइबरअटैक किया जा सकता है। रविवार से बड़े पैमाने पर ऐसे हमले हो सकते हैं, ऐसे में सभी को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। जानकारी के मुताबिक, अटैकर्स कोविड-19 के नाम का इस्तेमाल करते हुए इससे जुड़े ईमेल्स भेजकर पर्सनल और फाइनेंशल इन्फॉर्मेशन हैक कर सकते हैं। फिशिंग अटैक्स में यूजर्स को सरकारी सहायता राशि देने की बात कही जाएगी, जिससे वे अपनी डिटेल्स आसानी से शेयर कर दें। कोविड-19 से जुड़ी जानकारी के बाद आपका बैंक खाता खाली हो सकता है। एडवाइजरी में ncov2019@gmail.com जैसी ईमेल आईडी से खासतौर पर सावधान रहने की सलाह है। इन्हें न खोलने की हिदायत दी गई है। सरकार ने कहा है कि ऑनलाइन ठगों के पास 25 लाख से ज्यादा लोगों की निजी ईमेल आईडी होने की आशंका है। ठगों के ई-मेल 'फ्री कोविड-19 टेस्टिंग फॉर ऑल रेजीडेंट्स ऑफ दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद या अन्य के साथ आ सकते हैं। साइबर सिक्योरिटी अटैक कई तरह के होते है। इसमें मैलवेयर, फिशिंग अटैक, डीओएस, एमआईटीएम जैसे अनेकों शामिल हैं। सिस्टम को हैक करने, क्रिप्टोकरंसी के रूप में फिरौती या फिर डार्क वेब पर डेटा बेचते के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐजेंसी की ओर से कई तरीके बताए गए हैं, जिनसे यूजर्स खुद को सेफ रख सकते हैं। ऐसे किसी भी ईमेल पर यूजर्स को भरोसा नहीं करना चाहिए और कॉन्टैक्ट लिस्ट के बाहर से आए ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करने की गलती यूजर्स को नहीं करनी है। साथ ही एजेंसी ने यूजर्स से एंटी वायरस टूल्स की मदद लेने और फायरवॉल का इस्तेमाल करने को कहा है। इसके अलावा यूजर्स अपने सेंसिटिव डॉक्यूमेंट्स एनक्रिप्ट करके भी अटैक्स से बच सकते हैं।
बल्क में भेजी जाती है फिशिंग लिंक्स, रहें सतर्क: अन्येष रॉय
साइबर सेल के डीसीपी अन्येष रॉय ने बताया कि, जब भी देश या वर्डवाइड कोई बड़ा फाइनेंसियल इश्यू हो या महामारी। ऐसे साइबर अटैकर एक्टिव हो जाते हैं। फिलहाल पूरी दुनिया में कोविड-19 चल रहा है। ऐसे फिशिंग लिंक्स बना ली जाती हैं। फिर साइबर अटैकर बल्क में भेजते हैं। इसमें फाइनेंस सेक्टर, गर्वनमेंट ऐजेंसियां और अन्य होते हैं। अटैक के बाद डेटा कैप्चर समेत फाइनेंस की दिक्कतें आती हैं। वेबसाइट्स पर अपनी संवेदनशील जानकारी जैसे ईमेल आईडी, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड की डिटेल शेयर न करें। लिंक पर क्लिक करने से पहले, ध्यान दें कि वेबसाइट असली है या नकली है। मैसेज में या यूआरएल में किसी भी तरह की स्पेलिंग की गलतियों की जांच करें। अपने सिस्टम को लेटेस्ट सॉफ्टवेयर अपडेट के साथ अपडेट रखें। स्पैम मैसेज और ईमेल को न खोलें और न ही जवाब दें। ओपन वाई-फाई के इस्तेमाल से बचें। वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का इस्तेमाल करें जो आपके और वेबसाइट के बीच एक सुरक्षित टनल बनाता है।