पत्नी के जेवर गिरवी रख और लोन लेकर बनाया घर, गृह प्रवेश और जन्मदिन पर नहीं आए, बोले- देश पहले



  • 6 महीने पहले छुट्टी लेकर घर आए थे के पलानी

  • रुपयों का इंतजाम कर घर बनाने के लिए नींव पूजन किया और वापस चले गए थे

  • जन्मदिन पर रखा गया गृह प्रवेश लेकिन नहीं आए, बोले देश पहले घर बाद में

  • 1 जून को पत्नी से हुई थी आखिर बार बात, कहा था हमें सीमा पर ले जाया जा रहा है

  • गृह प्रवेश के दिन ससुर को फोन करके सुने थे गृह प्रवेश के मंत्र बोले मौजूदगी का करा रहा हूं एहसास


रामनाथपुरम। लद्दाख में चीनी सेना के साथ झड़प में तमिलनाडु के रामनाथपुरम निवासी 40 वर्षीय जवान के पलानी भी शहीद हो गए। उन्होंने देश की सीमा की रक्षा के लिए 3 जून को अपने जन्मदिन की पार्टी और गृह प्रवेश का समारोह भी छोड़ दिया था। बुधवार को, उनका नश्वर अवशेष उनके नए घर में लाया जाएगा। यह घर उन्होंने बहुत ही मेहनत से बनाया था। उनका गृह प्रवेश होगा लेकिन अब इसे देखने के लिए वह जीवित नहीं हैं। के पलानी ने अपनी पत्नी वानाथीदेवी (33) को 1 जून को फोन पर बताया, 'हमें सीमा पर ले जाया जा रहा है, इसलिए अब तुम्हारा मुझसे संपर्क नहीं हो पाएगा... चिंता न करें।' वानाथीदेवी की अपने पति से लगभग चार मिनट बात हुई। यह आखिरी बार था जब दोनों की बात हुई। दो दिन बाद घर में के पलानी का जन्मदिन मनाया गया और गृह प्रवेश भी हुआ। पलानी के ससुर ने बताया कि उन्हें याद है कि गृह प्रवेश के दिन के पलानी ने उन्हें फोन किया और फोन पर गणपति होम के दौरान मंत्रों को सुना। उन्होंने कहा कि भले ही वह वहां मौजूद नहीं हैं लेकिन अपनी मौजूदगी का एहसास दिला रहे हैं। राजस्थान में सेना के क्लर्क और पलानी के भाई इधायकानी (25) ने मंगलवार सुबह 9 बजे परिवार को उनके शहीद होने की खबर दी। खबर सुनते ही परिवार टूट गया। वानाथीदेवी बेहोश हो गई। 10 वर्षीय पलानी के बेटे प्रसन्ना और 8 साल की बेटी दिव्या को यह महसूस होने में कुछ समय लगा कि उनके पिता के साथ क्या हुआ। घर में रिश्तेदार और दोस्त जमा होने लगे और परिवार को सांत्वना देने लगे। एक रिश्तेदार ए आनंद ने बताया, 'हमें पता नहीं है कि क्या उसे गोली मार दी गई थी या उन्हें पत्थरों से मारा गया है। हम हैरान हैं, लेकिन हमें भी उनकी शहादत पर गर्व है।' किसान कालीमुथु के तीन बच्चों में सबसे बड़े के पलानी ने 18 साल की उम्र में सेना जॉइन की थी। उनके माता-पिता बहुत कम कमाते थे, इसलिए पलानी दसवीं कक्षा के आगे पढ़ाई नहीं कर सके। वह सेना में हवलदार हो गए। सेवा में रहते हुए, पलानी ने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से बीए की डिग्री प्राप्त की। उनकी पत्नी एक निजी कॉलेज में क्लर्क हैं। पलानी ने छह महीने पहले अपने गांव आए थे। यहां छोटी सी जमीन पर घर बनाने के लिए आधारशिला रखी थी।घर बनाना के पलानी का सपना था। एक दोस्त ने बताया कि इसके लिए उन्होंने बैंक से लोन लिया था। उनके पास डाउन पेमेंट नहीं था तो पत्नी के जेवर गिरवी रखे। वह इसी साल सेना से रिटायरमेंट लेना चाहते थे ताकि लोन की रकम चुका सकें और पत्नी के गिरवी रखे जेवर छुड़ा सकें।