शादी के बाद क्यों सास-ससुर से अलग रहना पसंद करती हैं पत्नियां?


शादी के बाद हर कोई यही चाहता है कि जीवनभर सब अच्छे से और खुशी से साथ रहें। हालांकि, आजकल विवाह के बाद कपल का लड़के के पैरंट्स के घर को छोड़ अलग से रहना आम बात होती जा रही है। ऐसे मामलों में पुरुष अक्सर अपनी पत्नी को माता-पिता से अलग होने की वजह बताते हैं। लेकिन ऐसे क्या कारण होते हैं, जो पत्नियां सास-ससुर से अलग रहने का दबाव डालने लगती हैं? चलिए जानते हैं इनके बारे में:
सास-ससुर से न बनना
यह उम्मीद करना कि शादी के बाद सास-ससुर और बहू के बीच का रिश्ता बिल्कुल परफेक्ट होगा यह वास्तविकता कम और कल्पना ज्यादा होती है। हर परिवार और व्यक्ति एक-दूसरे से अलग होता है और उनका जीवन जीने का तरीका भी अलग होता है। ऐसे में बहू उसमें ढल ही जाए यह जरूरी नहीं, क्योंकि इतने सालों में उसे अपने मायके में जो परवरिश मिली, उसके मुकाबले ससुराल का वातावरण ठीक उलट हो सकता है। इसी तरह सास-ससुर भी बहू की अलग सोच या फिर अपनी जमी-जमाई गृहस्थी में उसकी अलग अप्रोच से परेशान हो सकते हैं। इतने सालों बाद इन नई चीजों को अपनाना उनके लिए चैलेंजिंग साबित हो सकता है। ऐसे में उनकी भी बहू के साथ जमे यह जरूरी नहीं। शुरुआत में तो भले ही सभी इन चीजों को इग्नोर करते हुए शांति बनाए रखें, लेकिन धीरे-धीरे ये अंतर झगड़े का रूप लेने लगते हैं, जो बहुत ज्यादा बढ़ जाएं, तो पत्नियां अलग होने का दबाव बनाने लगती हैं।
जेठानी से न बनना
ऐसे कई परिवार हैं, जहां जेठानी और देवरानी के बीच बिल्कुल नहीं बनती है। इस तरह के परिवारों में रोजाना के झगड़े आम बात हैं। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब दो बहुओं के बीच इस बात को लेकर खींचतान चलती है कि उस घर में किसकी चलेगी? इस स्थिति में कुछ महिलाएं रोज के झगड़ों में पड़ने से अच्छा अलग हो जाने का रास्ता ही सही समझती हैं और वे अपने पति पर इसका दबाव बनाना शुरू कर देती हैं।
अजस्टमेंट इशू
हर परिवार के अपने रिवाज और परंपराएं होती हैं, ऐसे में कई बार बहुओं को इनके मुताबिक ढलने में परेशानी आती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी घर में यह रिवाज हो कि सुबह के नाश्ते से लेकर दिन का खाना बहुएं ही बनाती हों, तो उन महिलाओं को दिक्कत आ सकती है, जिन्हें सुबह ऑफिस जाना होता है। इसी तरह कुछ परिवारों में लड़कियों के लिए एक कर्फ्यू टाइम तय होता है। इस स्थिति में भी बहू अगर ऑफिस से लेट आए, तो उसे सास-ससुर से सुनने को मिल सकता है। महिला के लिए जब इन स्थितियों में अजस्ट करना मुश्किल हो जाता है, तो वह अलग होना ही बेहतर समझती है।
पति के साथ समय नहीं मिल पाना
चाहे लव मैरेज हो या फिर अरेंज्ड, हर कपल को शादी के बाद अपने रिश्ते पर नए सिरे से काम करना होता है। कई बार देखा जाता है कि पति-पत्नी शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने में ही इतना बिजी हो जाते हैं कि उन्हें आपस में क्वॉलिटी टाइम स्पेंड करने का मौका ही नहीं मिलता। यह स्थिति खासतौर पर पत्नी के लिए चैलेंजिंग होती है, क्योंकि वह तो उस परिवार में आई ही पति के कारण है। ऐसे में उसी के साथ समय न मिल पाना, उसे फ्रस्टेट कर देता है और उनके बीच झगड़े शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति को संभालने के लिए पत्नियां पति के साथ अलग घर में शिफ्ट होने के बारे में सोचने लगती हैं।
मानसिक शांति और ज्यादा बेहतर रिश्तों के लिए
सास-ससुर या ससुराल के किसी अन्य मेंबर से न बनना, पति के साथ समय न मिलना और ससुराल में अजस्ट न कर पाने जैसे चीजें, जबरदस्त मेंटल स्ट्रेस बनाती हैं। इस स्थिति में महिला चिड़चिड़ी हो जाती है और झगड़े बढ़ने लगते हैं। इस स्थिति को अवॉइड करने और मानसिक शांति के लिए कई बार पत्नियां इन लॉज़ से अलग होने का फैसला लेती हैं। यह फैसला सास-ससुर के लिए भी कई बार अच्छा ही साबित होता है, क्योंकि वे भी रोज-रोज की चिक-चिक से परेशान हो चुके होते हैं। कई बार देखा गया है कि इस स्थिति में परिवार ज्यादा सुखी रहते हैं, क्योंकि इसमें उनका एक-दूसरे की जिंदगी में दखल कम हो जाता है, जो शांति बनाए रखता है।