गुना दलित किसान पिटाई कांडः क्या कलेक्टर-एसपी के हटाए जाने से नहीं होगी किसी दलित-किसान की पिटाई


गुना। गुना में दलित परिवार के साथ पुलिस की बर्बरता मामले में मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि अभी तक यह फैसला नहीं हो पाया है कि जांच टीम कब भोपाल से रवाना होगी। साथ ही जांच कमेटी में कौन-कौन होगा यह गुरुवार को तय होगा। इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए सीएम शिवराज ने गुना के डीएम और एसपी को हटा दिया है। ऐसे में सवाल यही है कि आजादी के बाद से ना जाने कितने दलित , असहाय, किसानों पर पुलिस की बर्बरता की घटनाएं हो चुकी हैं इसकी गणना करना भी मुश्किल है। इतना ही नहीं इन बर्बरता के बाद कार्रवाई के तहत कई दफे डीएम-एसपी हटाए जाते रहे हैं। इन सब के बीच बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या डीएम-एसपी के हटाने से ऐसी घटनाएं देश में थम गई हैं? 
सियासी बना गुना में दलित की पिटाई
गुना में दलितों पर पुलिस की बेरहमी के मामले को सियासी रंग देने की कोशिश शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले में ट्वीट कर कहा है 'हमारी लड़ाई इसी सोच और अन्याय के ख़िलाफ़ है।' राहुल के इस ट्वीट पर पहला सवाल यही उठता है कि क्या वह इसी से बच सकते हैं कि इस वक्त मध्य प्रदेश में वह सत्ता में नहीं हैं। क्या यह किसी को बताने की जरूरत है कि इस तरह की बर्बरता किसी एक सरकार के आने और चले जाने से होती है। दरअसल, गरीब-बेसहारा पर पुलिस प्रशासन की बर्बरता की सोच अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। कांग्रेस पार्टी ने इस देश पर छह दशक से ज्यादा समय तक राज किया है, तो क्या पुलिस-प्रशासन की बर्बर सोच को कानून के दायरे में लाने के लिए ये कम वक्त होता है?
बीजेपी खुद को कैसे बचा सकती है?
राहुल गांधी के ट्वीट के बाद मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा कमलनाथ सरकार को दोष दे रहे हैं। पुरानी सतना अपहरण की घटना को याद कर बता रहे हैं कि कमलनाथ की सरकार आने से राज्य में गुंडागर्दी बढ़ी है। वे कह रहे हैं कि कमलनाथ की सरकार में अपराधी पर कार्रवाई नहीं होती थी, उनके शासन में हर दोषी के खिलाफ कार्रवाई होती है। नरोत्तम शायद भूल गए हैं कि वह इस वक्त सत्ताधारी हैं। दलितों की पिटाई किसी गुंडे ने नहीं, बल्कि पुलिस ने की है। क्या राज्य की पुलिस प्रशासन भी गुंडों की तरह किसी दलित की पिटाई कर देगी। क्या सरकार ऐसी घटनाएं होने का इंतजार करती रहेंगी। अपने इस बयान के जरिए नरोत्तम मिश्रा क्या कहना चाह रहे हैं। क्या सरकारें पिछली घटनाओं को बताने के लिए होती हैं।
किसके इशारे पर हुई ऐसी बर्बर कार्रवाई
हमारे देश का कानून फांसी की सजा पाने वाले को भी मोहलत देता है। ये तो किसान थे, जिन्होंने बस अपने आजाद देश के किसी जमीन के टुकड़े पर अनाज बोए थे। वे फसल पकने की मोहलत ही तो मांग रहे थे। जमीन खाली कराने की प्रक्रिया में पहले नोटिस जारी होता है, फिर कई दौर की समझाइश होती है। आखिर में हल्का बल प्रयोग की नीति है। लेकिन जब गरीब और बेसहारा की बात आती है तो पुलिस उनपर सीधे डंडे बरसाने लग जाती है। हमारे कानून में किसी किसान परिवार पर बल प्रयोग करने की किसी भी सूरत में इजाजत नहीं देता है। इस घटना के बाद सीएम शिवराज ने बैठक बुलाई है, जिसमें तय होना है कि सरकारी जमीन का रखरखाव कैसे हो।