कानपुर किडनैपिंग केस में एक और ट्विस्ट, किडनैपर्स 30 लाख लेकर फुर्र, पुलिस देखती रही!



  • कानपुर से 22 जून को किडनैप हुए लैब टेक्निशन संचित यादव मामले में एक के बाद एक नए ट्विस्ट सामने आ रहे

  • पीड़ित की बहन ने कहा कि उन्होंने स्वाट टीम के इंचार्ज दिनेश यादव के दबाव में दिया था खाली बैग वाला बयान

  • लैब टेक्निशन संचित की बहन ने फिर दोहराया कि किडनैपर्स ने पैसे भी ले लिए और उनका भाई भी नहीं मिल सका


कानपुर। कानपुर से 22 जून को किडनैप हुए लैब टेक्निशन संचित यादव मामले में एक के बाद एक नए ट्विस्ट सामने आ रहे हैं। 30 लाख रुपए फिरौती देने का दावे से पलटने के बाद अब पीड़ित की बहन ने कहा कि उन्होंने स्वाट टीम के इंचार्ज दिनेश यादव के दबाव में बयान दिया था। संचित की बहन ने फिर दोहराया कि किडनैपर्स ने पैसे भी ले लिए और उनका भाई भी नहीं मिल सका। बता दें कि बुधवार सुबह संचित की बहन ने मीडिया के सामने बयान दिया कि किडनैपर्स को दिए गए बैग में पैसे नहीं थे लेकिन शाम को उन्होंने कहा कि सुबह वाला बयान स्वाट टीम के इंचार्ज दिनेश यादव के दबाव मे दिया था। संचित की बहन ने कहा, 'पुलिस वाले घर आए थे और कहा था कि किडनैपर खिसिया गए तो भाई नहीं मिलेगा, तभी खाली बैग वाला बयान दिया। 
22 जून से किडनैप है लैब टेक्निशन
22 जून को निजी पैथॉलजी में काम करने वाला युवक संचित 22 जून को घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं आया। संचित के पिता ने बताया था कि बेटी की शादी इलाके के ही राहुल नाम से युवक से तय हुई थी। राहुल का चाल-चलन ठीक नहीं था तो रिश्ता तोड़ दिया। इसके बाद धमकी भरे कॉल आने लगे। 26 जून को संचित की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखी गई। 29 जून को पिता के पास फिरौती के लिए फोन आया।
गहने -मकान बेचकर जुटाए थे पैसे
किडनैपर्स ने संचित को छोड़ने के लिए 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी। पीड़ित के पिता ने बर्रा थाने के एसएचओ रणजीत राय और एसपी अपर्णा गुप्ता को पूरा केस बताया, लेकिन दोनों ने ही रुपयों का इंतजाम करने को कहा। परिवार ने किसी तरह मकान और गहने बेचकर 30 लाख रुपये जुटाए गए। किडनैपरों ने सोमवार रात गुजैनी रेलवे क्रॉसिंग पर परिवार को पैसों के साथ बुलाया।
किडनैपर्स पैसे लेकर भाग गए
परिवार का दावा है कि पुलिस भी उनके साथ गई और रुपयों से भरे बैग में मोबाइल भी रखवा दिया। किडनैपर्स के बताए तरीके के मुताबिक, हाइवे से बांदा रेलवे लाइन पर रुपयों से भरा बैग फेंक दिया गया। संचित को हनुमान मंदिर के पास मिलना था, लेकिन वह नहीं मिला, जबकि किडैपर्स रुपये लेकर भाग गए। मोबाइल तोड़कर वहीं फेंक दिया।
एसएसपी को मामले की जानकारी नहीं
पीड़ित परिवार ने मंगलवार को एसएसपी ऑफिस पर हंगामा किया तो एसएसपी दिनेश कुमार पी ने कहा कि उन्हें वारदात के बारे में किसी ने कुछ बताया नहीं गया। उन्होंने कहा, 'रुपयों पर कुछ नहीं कहूंगा। सारा फोकस युवक को सकुशल छुड़वाने पर है।'
रुपयों का स्रोत पूछ रहीं एसपी
एसपी अपर्णा गुप्ता ने बुधवार को बताया, 'पीड़ित परिवार से रुपयों के सोर्स के बारे में पूछा गया तो वे कुछ नहीं बता सके। बैग खाली था। पैसे देने का आरोप गलत है।' वहीं, एक विडियो में एसपी यह बताते दिख रही हैं कि कैसे हाईवे से बैग फेंकने पर नीचे जाना मुश्किल है, क्योंकि यह दूरी डेढ़ किमी है।