भिवंडी इमारत हादसे में अब तक 41 मौतें, 70 घंटे बाद भी मलबे से मिले शव



  • महाराष्ट्र के भिवंडी में तीन मंजिला इमारत ढहने में मरने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई

  • पुलिस ने बताया, मृतकों में 18 बच्चे भी शामिल, जिनकी उम्र दो से लेकर 15 वर्ष के बीच है

  • अधिकारी ने बताया कि अभी तक 25 लोगों को मलबे से जिंदा बाहर निकाला गया है


कांती जाधव,(ठाणे)। महाराष्ट्र के भिवंडी में तीन मंजिला इमारत ढहने में मरने वालों की संख्या गुरुवार को बढ़कर 41 हो गई। पुलिस ने बताया कि मृतकों में 18 बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी उम्र दो से लेकर 15 वर्ष के बीच है। अधिकारी ने बताया कि अभी तक 25 लोगों को मलबे से जिंदा बाहर निकाला गया है। मलबे से जिंदा निकाले गए घायलों को भिवंडी और ठाणे के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मलबे से निकाले गए शव क्षत-विक्षत हैं, क्योंकि वे 70 घंटे से अधिक समय से दबे थे।
अधिकारी ने बताया कि 43 वर्ष पुरानी जिलानी बिल्डिंग सोमवार तड़के तीन बजकर 40 मिनट पर ढह गई थी। इमारत में 40 फ्लैट थे और करीब 150 लोग यहां रहते थे। भिवंडी, ठाणे से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है। धामनकरनाका के पटेल कंपाउंड स्थित जिलानी बिल्डिंग की दुर्घटना के बाद भिवंडी शहर की खतरनाक और अति खतरनाक इमारतों पर प्रश्न एक बार फिर खड़ा हो गया है। इस इमारत की दुर्घटना के जवाबदार की तलाश की जा रही है। कहा जा रहा है कि मनपा ने फरवरी में मिले नोटिस के बाद यदि निवासियों से इमारत खाली करवा ली गई होती, तो लोगों की जान बच सकती थी।
शहर में सैकड़ों हैं मौत के मुहाने पर, नोटिस की खानापूर्ति
भिवंडी में बड़े पैमाने पर बिना मनपा की अनुमति से बनी गैरकानूनी, खतरनाक एवं अतिखतरनाक इमारतें हैं। ऐसी इमारतों के लिए मनपा प्रशासन नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है। मनपा सूत्रों के अनुसार, शहर के विभिन्न इलाकों में तकरीबन 742 इमारतें खतरनाक हैं, जिनमें 242 इमारतें अति खतरनाक हैं। सभी इमारतों को मनपा ने नोटिस दे रखी है। लेकिन, मनपा अधिकारियों एवं स्थानीय नगरसेवकों की मिलीभगत से इमारतों में रहने वाले खाली नहीं करते। उन्हें डर रहता है कि जमीन मालिक इमारत खाली करने के बाद नया मकान देगा या नहीं। इसीलिए खराब होने पर इमारत को सिर्फ रंग-पोत दिया जाता है।
पटेल कंपाउंड का मामला
बताया जाता है कि कामतघर ग्राम पंचायत के अंतर्गत सय्यद मिया जिलानी ने 1984 में भूमितल सहित एक महले की इमारत बनाकर उसे बेच दिया था। उन्होंने इमारत की छत भी बेच दी थी, जिसके बाद उसे खरीदने वाले किसी दूसरे व्यक्ति ने उसके ऊपर बिना किसी अनुमति के दूसरी और तीसरी मंजिल बनाकर बेच दिया। भवन निर्माता ने यह भी ध्यान नहीं दिया कि इमारत की नींव इतनी मजबूत नहीं है। पिछले 10 साल में ऐसी धोखाधड़ी तेजी से बढ़ी है। एक भवन निर्माता ने बताया कि पूर्व मनपा आयुक्त ए.डी. हांगे के कार्यकाल में इस तरह की इमारतों की बाढ़ आ गई थी।
एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत
यूसुफ शेख के परिवार के 6 लोगों की मौत हो गई है। मंगलवार को बड़े बेटे और बहू की लाश मलवे से निकाली गई थी और बुधवार को छोटे बेटे सोहेल, नातिन निदा (5), सादिया (3) एवं नाती हसनैन (2) के शव निकाले गए।