दिल्ली दंगे: जांच पर पूर्व आईपीएस रिबेरो के सवालों पर बोले पुलिस कमिश्नर- हम सिर्फ तथ्य, सबूत देखते हैं



  • दिल्ली दंगों की जांच पर सवाल उठाते जूलियो रिबेरो के खत का अब पुलिस कमिश्नर ने दिया जवाब

  • दिल्ली पुलिस चीफ एस. एन. श्रीवास्तव ने जवाबी खत में लिखा- हमारी जांच सिर्फ तथ्यों, सबूतों पर आधारित होती है

  • श्रीवास्तव ने लिखा है कि दंगे के सिलसिले में अब तक 1,571 लोग अरेस्ट हुए, इनमें दोनों समुदायों के लोग लगभग बराबर

  • इससे पहले रिबेरो ने कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई हुई, हेट स्पीच देने वालों के खिलाफ नहीं


नई दिल्ली ब्यूरो। दिल्ली दंगों की जांच पर उठ रहे सवालों को पुलिस कमिश्नर ने सिरे से खारिज किया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस. एन. श्रीवास्तव ने कहा है कि हमारी जांच तथ्यों और सबूतों पर आधारित होती है। यह इससे प्रभावित नहीं होती कि जांच के दायरे में आया शख्स कितना नामी है या कितने बड़े व्यक्तित्व वाला है। दरअसल, फरवरी में हुए दिल्ली दंगों की जांच पर सवाल उठाते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी जूलियो रिबेरो ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को खत लिखा था। अब पुलिस कमिश्नर एस. एन. श्रीवास्तव ने उनके खत का जवाब देते हुए आरोपों को सिरे से खारिज किया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस. एन. श्रीवास्तव ने मंगलवार को कहा कि बल अपनी शपथ और संविधान के हिसाब से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अपराध के मामलों में बल द्वारा की जाने वाली जांच तथ्यों और साक्ष्यों से निर्देशित होती है, प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व से नहीं। पूर्व आईपीएस अधिकारी जूलियो रिबेरो के लिखे गए हालिया खत पर प्रतिक्रया देते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसी कई संस्थाएं हैं जिनके पास 'धोखे के जाल' बुनने और पुलिस की ओर से 'पूर्वाग्रह और असंवेदनशीलता का झूठा वर्णन' करने के अपने कारण हैं। रिबेरो ने अपने पत्र में दिल्ली दंगों की जांच पर सवाल खड़े किए थे। रिबेरो को किए गए ई-मेल में दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने कहा कि बल ने जाति या धर्म के आधार पर पक्षपात किए बिना दंगों के सिलसिले में अब तक 1,571 लोगों को गिरफ्तार किया है और इनमें दोनों समुदायों के लोग लगभग समान संख्या में शामिल हैं। जूलियो रिबेरो समेत कुल 9 पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस. एन. श्रीवास्तव को खत लिखकर दिल्ली दंगों की जांच पर सवाल उठाए थे। अपने खत में रिबेरो ने लिखा है कि दिल्ली पुलिस शांति से प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ तो कार्रवाई कर रही है लेकिन हिंसा भड़काने के लिए जिम्मेदार हेट स्पीच देने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है।