गांव में घुसा मगरमच्छ, ग्रामीणों ने बंधक बनाया, फिर वन विभाग से मांगी 50 हजार की 'फिरौती'



  • लखीमपुर के एक गांव में घुसा मगरमच्छ, गांव वालों ने खुद किया रेस्क्यू

  • गांव वालों ने वन विभाग की टीम पर देर से पहुंचने का लगाया आरोप

  • मगरमच्छ पकड़ने के एवज में गांव वालों ने वन विभाग से मांगा 50 हजार


लखीमपुर-खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। तीन दिन पहले दुधवा टाइगर रिजर्व के सामने स्थिति मिदानिया गांव के तालाब में एक मगरमच्छ तैरता दिखाई दिया। खतरा देख ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। जब वे समय पर नहीं पहुंचे तब ग्रामीणों ने खुद ही 15 लोगों की एक टीम बनाकर मगरमच्छ का रेस्क्यू किया। इसके बाद मामला तब थोड़ा तनावपूर्ण हो गया, जब ग्रामीणों ने जान पर खेलकर किए गए इस रेस्क्यू के बदले वन विभाग से 50 हजार रुपये का मुआवजा मांगना शुरू कर दिया। मामला मंगलवार का है। रिजर्व बफर एरिया के डेप्युटी डायरेक्टर अनिल पटेल ने बताया कि मिदानिया गांव से उन्हें फोन आया था कि गांव के तालाब में एक बड़े मगरमच्छ को देखा गया है। यह बच्चों और पालतू जानवरों की जान के लिए खतरा हो सकता है। इसके बाद वन विभाग ने एक टीम को मगरमच्छ का रेस्क्यू करने के लिए गांव में भेजा। अंधेरा हो जाने की वजह से टीम ने उस दिन काम नहीं शुरू किया और मगरमच्छ के रेस्क्यू की योजना बुधवार सुबह तक टाल दी। इसके बाद बुधवार को सुबह गांव से एक और फोन आया, जिसमें बताया गया कि वन विभाग के कर्मियों का इंतजार करते वे थक गए थे, इसलिए उन लोगों ने खुद ही मगरमच्छ का रेस्क्यू करने का फैसला कर लिया। वन विभाग की टीम अनिल शाह के नेतृत्व में जब गांव पहुंची तो उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने तालाब का पानी खाली करा मगरमच्छ को एक रस्सी से बांध रखा था। गांव वालों ने बताया कि इस काम के लिए उन्होंने 15 लोगों की एक टीम बनाई थी।
ग्रामीणों ने मांगे 50 हजार
गांव के प्रधान शर्मा प्रसाद ने कहा कि उन्होंने मगरमच्छ को पकड़ने में अपनी जान जोखिम में डाली है।ऐसे में उन्हें इसका मुआवजा मिलना चाहिए। अनिल पटेल ने बताया कि ग्रामीणों ने मगरमच्छ को छोड़ने के बदले में 50 हजार रुपये की मांग की। घंटो बहस के बाद भी ग्रामीण नहीं माने। बाद में पुलिस गांव में पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने मगरमच्छ को नहीं छोड़ा तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद गांव के लोगों ने मुआवजे की मांग को विराम दे दिया। पटेल ने बताया कि मामले को रिकॉर्ड किया गया है लेकिन ग्राम प्रधान के निवेदन पर गांव वालों के खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मगरमच्छ को ग्रामीणों के कब्जे से लेने के बाद उसे घाघरा नदी में छोड़ दिया गया।