गुजरात का एकमात्र तमिल मीडियम स्कूल हुआ बंद, छात्रों ने प्रदर्शन कर कहा, 'अब हम कहां पढ़ेंगे?'



  • गुजरात में तमिल मीडियम के एकमात्र स्कूल के अचानक बंद करने के आदेश से टीचर्स समेत स्टूडेंट्स हैरान

  • स्कूल के अध्यापक और छात्रों ने शुक्रवार को अहमदाबाद कलेक्ट्रेट के बाहर इसके खिलाफ प्रदर्शन किया

  • 1971 में तमिल मजदूरों की मांग पर गुजरात में स्कूल शुरू किया गया था, बाद में कम होती गई छात्रों की संख्या


अहमदाबाद। गुजरात में तमिल मीडियम सेकंडरी और हाइयर सेकंडरी सेक्शन के एकमात्र स्कूल के अचानक बंद करने के आदेश से टीचर्स समेत स्टूडेंट्स हैरान हैं। शुक्रवार को स्कूल के अध्यापक और छात्रों ने अहमदाबाद कलेक्ट्रेट के बाहर इसके खिलाफ प्रदर्शन किया। 1971 में प्रवासी तमिल मजदूरों की मांग पर गुजरात में अनुदान प्राप्त स्कूल शुरू किया गया था। ये मजदूर अहमदाबाद की मिलों में काम करने के लिए आये थे। एक समय में इस स्कूल में 500 से अधिक छात्र हुआ करते थे लेकिन आज यह संख्या 31 तक सिमटकर रह गई है।
बिना किसी अडवांस नोटिस के बंद हुआ स्कूल
स्टूडेंट्स और टीचर्स ने दावा किया कि 11 अगस्त को बिना किसी अडवांस नोटिस ने प्रशासन ने स्कूल बंद कर दिया। कुछ दिन पहले भी उन्होंने प्रदर्शन किया था। सबसे पहले उन्होंने डीईओ के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद गांधीनगर में एजुकेशन बोर्ड के बाहर प्रदर्शन और अब कलेक्ट्रेट के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। स्कूल के पूर्व छात्र सत्यावन एन ने कहा, 'हमने इस संबंध में डीईओ, शिक्षा मंत्री के जॉइंट सेक्रेटरी और अहमदाबाद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि स्कूल को जारी रखा जाए क्योंकि छात्रों की शिक्षा दांव पर लगी है।'
स्कूल से स्टूडेंट्स की संख्या भी घटने लगी
दरअसल मिलों के बंद होने से अहमदाबाद में तमिल भाषियों की संख्या भी सिकुड़ती चली गई। नतीजा, स्कूल से स्टूडेंट्स की संख्या भी घटने लगी। बचे हुए तमिल भाषियों ने इंग्लिश मीडियम स्कूल में ऐडमिशन ले लिया। 2008-09 में बोर्ड ने तमिल मीडियम में परीक्षा करानी भी बंद कर दिया। ऐसे में स्कूल चलाने के लिए प्रबंधन ने सरकार से स्कूल का मीडियम बदलकर इंग्लिश करने और साथ ही तमिल को वैकल्पिक भाषा रखने की इजाजत मांगी थी। हालांकि स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ाने के लिए यह उपाय भी काम नहीं आया।