कब्रिस्तान में कब्रें नहीं हैं सुरक्षित, 1993 बम धमाकों के आरोपी रहे याकूब मेमन की कब्र बेचने पर हुआ खुलासा



  • मुंबई 1993 बम धमाकों के आरोपी रहे याकूब मेमन की फांसी के पांच साल बाद उसकी कब्र को बेचने का मामला हुआ दर्ज

  • मुंबई के एलटी मार्ग पुलिस स्टेशन में मामला में याकूब के चचेरे भाई ने दर्ज करवाया मामला

  • मुंबई के कब्रिस्तानों में हो रहा है कब्र बेचने के गोरखधंधा

  • पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है पुराने मामलो की भी जांच की जाएगी


मुंबई ब्यूरो। मुंबई में कोरोना काल में भी घोटालेबाज़ों के हौसले बुलंद हैं। ताजा मामला 1993 बम धमाकों के आरोपी रहे याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन की कब्र को धोखे से बेचने का मामला सामने आया है। इस मामले ने पुलिस ने कब्रिस्तान के ही दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आपको बता दें याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन 1993 में हुए मुंबई बम धमाके में शामिल आरोपियों में से एक था, जिसे बाद में कोर्ट ने दोषी करार दिया था और उसे नागपुर केंद्रीय जेल में फांसी दी गई थी। याकूब को ३० जुलाई, २०१५ को दक्षिण मुंबई के मरीन लाइंस स्थित बड़ा कब्रिस्तान में दफनाया गया था।
याकूब के भाई ने दर्ज करवाई शिकायत
कब्रगाह के इस फर्जीवाड़े की शिकायत याकूब के चचेरे भाई मोहम्मद अब्दुल रउफ मेमन ने इसी साल मार्च महीने में दक्षिण मुंबई के लोकमान्य तिलक पुलिस मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में दावा किया गया है कि मेमन के परिवार को मरीन लाइंस स्थित बड़ा कब्रिस्तान में कब्र के लिए सात स्थान दिए गए हैं। लेकिन अब पता चला है कि याकूब के अलावा, परिवार के तीन और कब्रों के स्थानों को पांच लाख रुपये में बेच दिया गया। इस फर्जीवाड़े का आरोप कब्रिस्तान की देखरेख करनेवाले ट्रस्ट के एक अधिकारी और एक प्रबंधक पर लगा है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आईपीसी की धारा 465 (फर्जीवाड़ा), 468 (ठगने के उद्देश्य से फर्जीवाड़ा) के तहत मामला भी दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
1993 बम धमाकों का आरोपी था याकूब मेमन
मुंबई शहर में अंडरवर्ल्ड डॉन दावूद इब्राहिम के इशारे पर 12 मार्च 1993 को मुंबई में सीरियल बम धमाके किए गए थे, जिसमें 257 लोगों की मौत हो गई थी और 700 लोग घायल हुए थे। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट याकूब पाकिस्तान के रास्ते दुबई गया था और 18 महीने तक यूएई और पाकिस्तान में रहा और19 जुलाई 1994 को नेपाल के रास्ते हिंदुस्थान लौट आया था। हिंदुस्थानी जांच एजेंसियों ने उसे 5 अगस्त 1994 को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि तब याकूब ने दावा किया था कि उसने नेपाल में २८ जुलाई को ही आत्मसमर्पण कर दिया था। मेमन परिवार में याकूब ही एक ऐसा इंसान था जो सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा था। जांच एजेंसियों के अनुसार याकूब मेमन, डी कंपनी का सबसे बड़ा सिपहसालार था। वह मुंबई धमाकों की योजना बनानेवाले प्रमुख लोगों में एक था। बड़े भाई टाइगर मेमन के गैर-कानूनी धंधों का हिसाब-किताब वही रखता था।