नहीं रहे 'मुंबई के बिरयानी किंग', लजीज जायके से पहचान बनाने वाले जफरभाई मंसूरी का कोरोना से निधन


मुंबई ब्यूरो। पिछले लगभग 6 दशक से अपने खास जायके से मुंबई वालों के दिल में जगह बनाने वाले जफरभाई मंसूरी को कोरोना वायरस ने अपना शिकार बना लिया। 'मुंबई के बिरयानी किंग' के तौर पर फेमस जफरभाई का कोरोना वायरस का इलाज चल रहा था, जहां गुरुवार को हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। 83 वर्षीय जफरभाई ने पहले तो दिल्ली दरबार रेस्त्रां और फिर बाद में अपने ही नाम पर जफरभाई दिल्ली दरबार चेन से खासी पहचान बनाई। अपने पीछे 4 बेटे और 3 बेटियों का भरापूरा परिवार छोड़कर गए जफरभाई को मरीन लाइन्स स्थित बड़ा कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया। कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें एक सप्ताह पहले ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर रखा गया था। मुंबई में मरीन लाइन्स, माहिम, ग्रांट रोड, जोगेश्वरी, वाशी, डोंगरी, मोहम्मद अली रोड तक जफरभाई के दिल्ली की कई ब्रांच हैं। उन्होंने मुंबई को मुगलई खाने के शौकीनों का पसंदीदा अड्डा बना दिया। चिकन और मटन बिरयानी के अलावा रेस्त्रां में चिकन टंगड़ी से लेकर रान सिकंदरी और दाल गोश्त तक तमाम डिशेज़ मिलती है। उर्दू के सीनियर एडिटर सरफराज आरजू ने वर्ली फाइव स्टार में फूड शो के दौरान जफरभाई की खासियत को याद किया, जब गेस्ट उनके जायकों से चकित हो गए थे। आरजू ने बताया कि वहां बिरयानी की कम से कम 40 वेराइटी लगी थी। उन्होंने बताया, 'जफरभाई ने नई और पुरानी रेसिपी के साथ एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने अवध के फ्लेवर के साथ मुंबई वालों को मुगलई खानों की खास वेराइटी मुहैया कराई। आरजू ने बताया, 'जफरभाई काफी विनम्र भी थे। वह कभी भी अकेले नहीं खाते थे और गेस्ट को साथ खाने के लिए इनवाइट करते थे। रोटी खाइए...उनका पसंदीदा वाक्य था।' खाने के साथ ही वह गजल और मुशायरों के शौकीन भी थे। वह कव्वाली की महफिलों में शामिल होते और अहमद फराज जैसे अंतरराष्ट्रीय पोएट को भी होस्ट कर चुके थे। काफी वक्त से जफरभाई को जानने वाले प्रफेसर कासिम इमाम ने बताया, 'युवावस्था में जफरभाई कमाठीपुरा के पास इस्लामपुरा में छोटा सा किचन चलाते थे। राजनीतिक और धार्मिक रैलियों में उनकी दुकान से खाने मंगाये जाते थे। वह अपनी पुरानी साइकल से खाना ले जाते थे। जफरभाई की मौत के साथ ही मुंबई की अदब और तहजीब का बाशिंदा भी चला गया।'