पत्थर मंडी में मौत का खेल और रंगदारी का नासूर

 



आशीष सागर दीक्षित,(बाँदा)। महोबा के पत्थर मंडी कबरई मुहल्ला जवाहर नगर निवासी क्रेशर व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी को हत्या करने की फिराक में गोली मारने की घटना से महोबा का माहौल गर्म हैं। क्रेशर व्यापारी के द्वारा एसपी उत्पीड़न के खुलासे से महोबा पत्थर मंडी में बड़ा उबाल हैं। क्रेशर व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने गोली लगने घटना से एक दिन पहले सोशल मीडिया में वीडियो वायरल कर अपनी हत्या होने व फर्जी मुकदमों में साजिशन फंसाये जाने की बात कही थी। गौरतलब हैं व्यापारी के गले मे गोली लगी हैं और वह गंभीर हालत में भर्ती हैं। बतलाते चले बीते 9 सितंबर को महोबा निलंबित एसपी मणिलाल पाटीदार पर पीड़ित व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने वीडियो के जरिये अवैध वसूली करने के साथ हत्या कराने की धमकी,फर्जी में मुकदमों में नामजद करने की आशंका जाहिर करते हुए पीड़ा को सार्वजनिक किया था। उन्होंने बताया था कि उनके साझेदार बालकिशोर द्विवेदी,पुरषोत्तम द्विवेदी के पास क्रेशर के लिए आवश्यक विस्फोटक मैग्जीन का लाइसेंस हैं। बावजूद इसके मौजूदा एसपी मणिलाल पाटीदार अपने मातहतों के माध्यम से 6 लाख रुपये प्रति माह देने का दबाव बनाते हैं। ऐसा न करने पर हत्या की धमकी,तमाम फर्जी मुकदमा लादने की धौंस दी जाती हैं। एसपी से भयाक्रांत होकर व्यापार में लॉक डाऊन घाटे,एनजीटी की सख्ती के बाद भी जून-जुलाई में 6-6 लाख रुपये दिए गए। पत्थर मंडी कारोबार में बड़ा घाटा होने से परिचित एसपी लगातार अवैध रंगदारी वसूलने में लगे थे और रुपये देने का दबाव बनाया जाता हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद क्रेशर व्यापारी को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या करने का सुनियोजित प्रयास किया। कानपुर के रीजेंसी में मौत से लड़ रहे व्यापारी के साथ घटी इस घटना के बाद ही अगले दिन एसपी मणिलाल पाटीदार का निलंबन हुआ हैं। अंदरखाने की परतें बतलाती हैं कि पीड़ित व्यापारी ने प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री तक शिकायत पत्र देकर एसपी की मनमानी पर खुलासा किया था। व्यापारी ने कबरई थानाध्यक्ष,कुछ पुलिसकर्मियों पर यह सरकारी सिंडीकेट चलाने के आरोप लगाए हैं। उधर क्रेशर यूनियन के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह बतलाते है कि नई खनिज नीति लागू होने से क्रेशर उद्योग पहले से संकट में था,कोर्ट की निगरानी से सैकड़ों क्रेशर पर बंदी की मार पड़ी तो एसपी की प्रशासनिक रुतबेदारी व्यापार पर भारी थी। उन्होंने एसपी के निलंबन को सही ठहराया हैं। बीजेपी के चरखारी से विवादित विधायक ब्रजभूषण राजपूत ने 10 सितंबर को प्रेसवार्ता कर ट्रकों की ओवरलोडिंग,अवैध खनन पर अपनी ही सरकार पर हल्ला बोल दिया। विधायक ने कार्यवाही न होने पर जनता के साथ लड़ने और जनता को ट्रक में आग तक लगा देने की बात कही हैं। काबिलेगौर हैं विधायक के पिता पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत भी महोबा के पहाड़ खदान संचालक रहे है। या यूं कहें महोबा का हर कद्दावर नेता खनन कारोबार या क्रेशर मंडी में सीधी हनक रखता हैं।
पत्थर मंडी में मिलती धीमी मौत
पताल तोड़ खनन से प्राकृतिक उजाड़ के बीच 5 हजार करोड़ का कारोबार होता हैं। नेशनल हाइवे 76 झाँसी-मिर्जापुर मार्ग (बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे) पर तीन सैकड़ा से अधिक स्टोन क्रेशर खेतिहर ज़मीन पर मानकों के उलट लगे हैं। खनिज अधिकारी की सांठगांठ, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी की आरामतलबी से बुंदेलखंड के लिए जलसंकट, परती भूमि,नेचुरल डिजास्टर, सूखा,पलायन की मुख्य वजह बन चुका यह कारोबार सरकारी शासनादेश के हर नियम-निर्देश की धज्जियां उड़ाता हैं। थक हारकर जब कभी एनजीटी या कोर्ट का डंडा चलता है तो फौरी कार्यवाही के बाद फिर वही होता हैं जो कारोबारी, सरकार, अधिकारी चाहते हैं मसलन अवैध वसूली,अवैध खनन,हत्याकांड की साज़िश,अस्थमा,सिलकोसिष, टीवी के मरीजों की खेती।✒महोबा में अवैध विस्फोटक, ओवरलोडिंग,अवैध खनन व्यापार की कमजोरी हैं जिससे यहां ब्यूरोक्रेसी कारोबार पर नकेल कसती हैं। नकेल नहीं चाहने वाले रंगदारी, वसूलीबाज लोगों को साधकर धंधा संचालित करते हैं। इस खेल में स्थानीय मीडिया की भूमिका भी कमोवेश वैसी हैं जैसे अन्य काले धंधे में रहती हैं। बाँदा की लाल बालू और महोबा का काला स्टोन चित्रकूट मण्डल में काली कमाई के बड़े स्रोत हैं जिनसे राजनीतिक दल पोषित होते और माननीय दबंग बनते हैं। पहाड़ों को बारूद से उड़ाने के लिए अमोनियम नाइट्रेट, जिलेट की छड़े हैवी 6 इंच होल में भरकर चलता है खनन का यह काला-सफेद रोजगार।
ज़िले में आधा सैकड़ा से अधिक ग्रामीण बीते दो दशक में विभिन्न खदानों में मौत की नींद सो चुके हैं। गांव वीरान हैं और खेती बर्बाद होकर खनन, क्रेशर उद्योग में पलायन न करने वाले किसानों को मजदूरों में तब्दील कर चुकी हैं। महोबा के निलंबित एसपी मणिलाल पाटीदार पर भ्रस्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7/13 व 384 के तहत अब जांच विजलेंस टीम को सुपुर्द की हैं। मुख्यमंत्री योगी की गोलीकांड के बाद यह सख्ती इस बात की बानगी हैं कि महोबा में रहना है तो खनिज विभाग के अधिकारियों,व्यापारियों,पत्रकारों के साथ किसानों को हर जोर-जुल्म सहना हैं। बाँदा में रहे सुर्खिदार खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह का मोह चित्रकूट मण्डल से छूटता नहीं हैं। आजकल वे महोबा में पाए जा रहे हैं। शैलेंद्र सिंह जहां हो वहां माहौल गर्म न हो यह अतिश्योक्ति की बात होगी। यूपी सरकार का यह कमाऊपूत खनिज अधिकारी जहां रहता हैं वहीं अवैध खनन, ओवरलोडिंग,रोजगार सडांध शुरू हो जाती हैं। अलबत्ता यह हैं कि बुंदेलखंड छोड़ते ही नहीं हैं।