फीस नहीं देने पर स्कूल ने शिक्षा मंत्री की नातिन को क्लास करने से रोका, तो खुद काउंटर पर खड़े होकर जमा कराए पैसे



  • शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की नातिन का स्कूल की ऑनलाइन क्लास से हटा नाम

  • जगरनाथ महतो खुद स्कूल पहुंचे और काउंटर पर खड़े होकर जमा कराई फीस

  • मैं मंत्री के रूप में स्कूल नहीं गया, एक अभिभावक के तौर पर वहां पहुंचा: शिक्ष मंत्री

  • स्कूल के अधिकारियों ने ऑनलाइन क्लास से छात्रा के नाम काटने की बात से किया इनकार


बोकारो। कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से बहुत से लोगों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कई परिवार ऐसे भी हैं जो अपने बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं जमा कर पा रहे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने निजी स्कूलों को फीस के लिए अभिभावकों को परेशान नहीं करने की हिदायत दी थी। साथ ही शिक्षा विभाग की ओर से भी कई तरह की गाइडलाइंस भी जारी की गई। बावजूद इसके सूबे के निजी स्कूलों की मनमानी उस समय सामने आ गई जब खुद शिक्षा मंत्री को ही परेशानी का सामना करना पड़ा। पूरा मामला शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की नातिन से जुड़ा हुआ है। दरअसल, बोकारो के दिल्ली पब्लिक स्कूल ने समय पर फीस जमा नहीं करने पर कार्रवाई करते हुए शिक्षा मंत्री की नातिन रिया का नाम ऑनलाइन क्लास से काट दिया। इस मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा मंत्री तुरंत स्कूल पहुंच गए। यही नहीं उन्होंने काउंटर पर खड़े होकर अपनी नातिन की स्कूल की फीस जमा कराया।
जगरनाथ महतो ने खुद स्कूल पहुंचकर जमा कराई फीस
झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा, 'वह मंत्री के रूप में स्कूल नहीं गए थे। मेरी नातिन रिया ने मुझे फोन पर बताया कि दो दिन पहले उसका नाम ऑनलाइन क्लास की लिस्ट से हटा दिया गया, ऐसे में मैं एक अभिभावक के तौर पर वहां गया। रिया ने मुझे यह भी बताया कि उसने अपने शिक्षकों से ऑनलाइन क्लास में हिस्सा लेने की अनुमति को लेकर गुहार भी लगाई थी।' मंत्री की बेटी और रिया की मां रीना बोकारो स्टील टाउनशिप के सेक्टर 3 में ही रहती हैं। उनके पति बेरमो में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के कर्मचारी हैं। हालांकि, उन्होंने कभी मंत्री के साथ अपने रिश्ते को सार्वजनिक नहीं किया। 
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने दिए जांच के आदेश
दूसरी ओर बोकारो डीपीएस के अधिकारियों ने स्कूल की ऑनलाइन क्लास से छात्रा रिया के नाम काटने की बात से इनकार किया है। स्कूल की प्रिंसिपल इनचार्ज शैलजा जयकुमार ने कहा कि छात्रा नाम कभी लिस्ट नहीं हटाया गया था। वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने जांच की बात कही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं, जिससे स्कूल की ओर से किए जा रहे दावे की सच्चाई पता चल सके।