राह संघर्ष की जो चलता है वो ही संसार को बदलता है जिसने रातों से जंग जीती है सूर्य बनकर वही निकलता है : फिल्म निर्माता अनिल चौधरी


खागा/ फतेहपुर। कहते है किस्मत जब पलटती है तो बहुत कुछ बदल कर रख देती है इस कहावत को सच कर दिखाया है कस्बे के रहने वाले अनिल चौधरी ने महज 26 वर्ष की उम्र में फिल्मी दुनिया में अपना लोहा मनवाने में लगे है कभी अभिनेता बनकर तो कभी लेखक बनकर कभी निर्देशक तो कभी निर्माता बनकर श्री चौधरी को हाल ही में भोजपुरी की 6 फिल्मों में अपना हुनर दिखाने का मौका मिला इन्हे भोजपुरी कि इन 6 फिल्मों में अपना अभिनय और निर्माता बनने का मौका मिला फिल्में क्रमश: 1-राजधानी दिल्ली ,2- पावर आफ इंडिया,3- बदमाश,4- सोने की खान,5- आखिरी सांस,6- जिला फतेहपुर,  है जिसमें से जिला फतेहपुर,सोने की खान,बदमाश के लेखक श्री चौधरी ही है और आखिरी सांस, के लेखक फतेहपुर जिले के असोथर थाना क्षेत्र के बेरुई निवासी श्री आनंद कुमार गौतम जी है श्री चौधरी कहते है कि कोई ऐसी मंजिल नहीं जिसे कभी हासिल न कि जा सके जिला ब्यूरो चीफ मिस्टर देवव्रत त्रिपाठी जी को आभार व्यक्त करते हुए अनिल चौधरी जी कहते है कि पत्रकारिता देश का चौथा स्तम्भ है और मुझे खुशी है कि आप भी हमारे देश के चौथे स्तम्भ का हिस्सा हो श्री चौधरी के पिता दीपक चौधरी बताते है की कभी न सोचा था कि मेरा बेटा एक दिन यह मुकाम हासिल करेगा बड़े बेटे की सड़क हादसे में मृत्यु होने के बाद जिस तरह से छोटे बेटे अनिल चौधरी ने समाज में गलत नीतियों से लड़कर ये मुकाम हासिल किया है इसके लिए मुझसे ज्यादा खुशी और किसे होगी दीपक जी कहते है मेरी खुशी और इच्छा यह है कि मेरा बेटा एक दिन अपने जिले का नाम रोशन करे फतेहपुर जिले का जब जिक्र आए तो सबकी जुबान पर मेरे बेटे का नाम हो श्री चौधरी बताते है की उनका बचपन से सपना तो नहीं था लेकिन हालातो ने रुख मोड़ दिया जब हमारे संवाददाता ने सवाल किया कि आप क्या बनना चाहते थे तो अपने आंसू पोंछते हुए बताते है IPS लेकिन बड़े भाई की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने के बाद सब बदल गया मेरी पढ़ाई रुक गई मजे की बात यह कि श्री चौधरी सिर्फ चौथी क्लास तक ही पढ़े है और उनका इच्छा यह है कि जब यह 6 फिल्मे करके लौटेंगे तो अपने विद्यालय रमेश कल्याणकारी के अध्यापक श्री लालचन्द्र सिंह जी और गणेश सिंह जी और झल्ली प्रसाद मौर्य को स्वयं सम्मानित करेंगे जिनकी वजह से यह मुकाम हासिल किया ।
लडखडाया है जितना वो संभल जायेगा,
 वक्त आनें पे वो ही  अनिल बदल जायेगा,
 आज कहते हो ये क्या लिखते हो तुम,
 देखना जमाना मेरे गीत जब कल गायेगा।