शांतिकुंज भगदड़ मामला: 20 लोगों की मौत से जुड़ी फाइल गायब, हाई कोर्ट में देना था जवाब



  • शांतिकुंज भगदड़ मामले से जुड़ी फाइल कोर्ट में सुनवाई से पहले गुम

  • 2011 में एक कार्यक्रम में मची भगदड़ में 20 लोगों की हुई थी मौत

  • जनहित याचिका पर सरकार की तरफ से दाखिल किया जाना था जवाब

  • 2015 में हरीश रावत की सरकार आने के बाद वापस लिया था मुकदमा


देहरादून/हरिद्वार। हरिद्वार में शांतिकुंज 9 साल पहले एक बड़े आयोजन के दौरान भगदड़ के मामले से जुड़ी फाइल गुम हो गई है। हैरानी की बात यह है कि फाइल ऐसे समय गुम हुई जब मामले पर हाई कोर्ट में सुनवाई होने वाली थी। साल 2011 में मची भगदड़ के मामले से जुड़ी एक फाइल सचिवालय में गुम हो गई। फाइल गुमशुदगी के मामले में गृह विभाग की ओर से देहरादून नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। शांतिकुंज भगदड़ मामले में हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर सरकार को शुक्रवार को जवाब दाखिल करना था। जवाब दाखिल करने की कवायद के बीच ही फाइल की गुमशुदगी की खबर सामने आई। अब फाइल की तलाश की जा रही है। एहतियातन मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है। कोतवाली निरीक्षक शिशुपाल सिंह नेगी ने बताया कि गृह विभाग के अनुभाग अधिकारी पंकज जोशी की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
शांतिकुंज भगदड़ मामला
साल 2011 में हरिद्वार के मशहूर धार्मिक संस्थान शांतिकुंज के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की जन्म शताब्दी पर बड़ा आयोजन किया जा रहा था। इसमें शांतिकुंज से जुड़े लाखों लोग इकट्ठा हुए थे। बताया जाता है कि यज्ञशाला में दम घुटने के कारण कार्यक्रम में भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में 20 लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हो गए थे। भगदड़ से मौतों के मामले में कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ हरिद्वार नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस केस में पुलिस जांच कर रही थी। उस समय प्रदेश में बीसी खंडूरी के नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार थी। हालांकि उसके बाद कांग्रेस के सत्ता में आने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने साल 2015 में शांतिकुंज के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने के आदेश दिए थे।
जनहित याचिका से फिर बाहर आया जिन्न
इस मामले में एक वकील ने नैनीताल हाईकोर्ट में अगस्त 2020 में जनहित याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से 18 सितंबर को जवाब दाखिल करने को कहा था। कोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए फाइलों की तलाश की गई तो पता चला कि मामले से जुड़ी फाइल सचिवालय से ही गुम हो गई है। आपको बता दें कि शांतिकुंज प्रमुख डॉ प्रणव पंड्या की मुश्किलें इन दिनों लगातार बढ़ रही हैं। मई में छत्तीसगढ़ की एक युवती ने उन पर साल 2010 से 2014 के बीच दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। रेप के इन आरोपों की हरिद्वार पुलिस जांच कर रही है।