उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग पर पैतृक संपत्ति हड़पने का आरोप, चचेरे भाई ने पीएमओ को पत्र लिखकर मांगा न्याय


गाजियाबाद ब्यूरो। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग पर उनके चचेरे भाई ने तकरीबन 50 करोड़ की पैतृक संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया है। उन्होंने पीएमओ को एक पत्र लिखा है जिसमें अपनी जान को खतरा बताया है। साथ ही न्याय न मिलने पर पूरे परिवार के साथ आत्महत्या किए जाने की भी बात कही है। पत्र लिखने वाले श्याम गर्ग का कहना है कि उनके परिवार की पसोंडा में 100 बीघा जमीन थी। इस जमीन का कोई बंटवारा नहीं हुआ है। 
सुनवाई ना होने पर पीएमओ को लिखा पत्र
श्यान ने बताया कि उनके पिताजी की मृत्यु हो गई थी और उसके बाद परिवार के लोगों ने फर्जी मुख्तारनामा कर आपस में ही वह जमीन हड़प ली। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार इस मसले पर स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग से मिलने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया। श्याम ने बताया कि साल 2017 में भी अपनी संपत्ति लेने के लिए अतुल गर्ग पर एक केस दायर किया गया था लेकिन अभी तक पसोंडा वाली जमीन का कोई बंटवारा नहीं हुआ और उन्हें इसका हिस्सा नहीं मिला।आरोप है कि उन्होंने कई बार स्थानीय पुलिस से भी शिकायत की है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। इसके अलावा उन्होंने जनसुनवाई पर भी इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई इसलिए आहत होकर अब उन्होंने 11 सितम्बर को पीएमओ को पत्र लिखा है।
अधिवक्ता ने की सीबीआई जांच की मांग
श्याम गर्ग के अधिवक्ता विजय राठी ने बताया कि इस पूरे परिवार की संपत्ति की झगड़े की जड़ मुख्तारनामा है, जो कि साल 1993 में हुआ था। अधिवक्ता विजय राठी ने कहा कि इन सभी आरोपों की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने सभी आरोपों को बताया निराधार
वहीं पूरा मामले पर अतुल गर्ग का कहना है कि उनके पिताजी सात भाई थे, जिनका करीब 40 साल पहले बंटवारा हुआ था। इसमें कोई विवाद नहीं है। श्याम के पिताजी यानी विधायक के चाचा नरेश चंद्र गर्ग चौथे नम्बर के थे। उनके भी चार लड़के और एक लड़की थी। जिनका बंटवारा 20 साल पहले हो चुका है और कोई विवाद नहीं है। मंत्री ने कहा कि जिन्होंने आज उन पर आरोप लगाया है उन्होंने 6 साल पहले किसी कारणवश अपनी संपत्ति को बेच दिया था।
मंत्री ने कहा कि श्याम गर्ग द्वारा जो आरोप लगाए गए हैं वह सभी बेबुनियाद हैं और उन्होंने जो पीएमओ को पत्र लिखा है, निश्चित तौर पर उनकी छवि धूमिल करने की साजिश है। वह खुद चाहते हैं कि सरकार द्वारा एक समिति गठित कर गहनता से जांच करा ली जाए।