विकास दुबे के अपराधों की कई फाइलें गायब, सफेदपोश हैं सबसे बड़े राजदार


कानपुर ब्यूरो। बिकरू हत्याकांड की जांच में रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के बनाए न्यायिक आयोग और एसआईटी ने पुलिस से विकास दुबे के पुराने अपराधों के दस्तावेज मांगे थे। शहर के विभिन्न थानों में विकास दुबे के खिलाफ अपराधिक मुकदमें दर्ज हैं, थाने में पुराने मुकदमों की फाइलों को खंगाला गया तो, लगभग आधा दर्जन मुकदमों की फाइलें गायब मिली हैं, जिसका पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। बर्रा में केबल ऑपरेटर की 2004 में हत्या हो गई थी, हत्या का आरोप विकास दुबे समेत चार लोगों पर लगा था। इस हत्याकांड की फाइल अभियोजन कक्ष और थाने से गायब है। राजनीतिक संरक्षण ने विकास की जड़ों को मजबूत करने का काम किया है, वहीं सफेदपोशों ने भी विकास का इस्तेमाल ट्रंपकार्ड की तरह किया है। बर्रा थाना क्षेत्र स्थित बर्रा 7 में रहने वाले केबल ऑपरेटर दिनेश दुबे की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। 2001 के शुरूआती दौर में केबल का व्यापार तेजी से फैल रहा था। दिनेश दुबे बड़े केबल ऑपरेटर थे, दिनेश की हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप विकास दुबे समेत चार लोगों पर लगा था। लेकिन इस मामले में विकास दुबे बरी हो गया था। इसके बाद पुलिस की तरफ से अपील भी डाली गई थी।
अभियोजन कक्ष और थाने से गायब मिली फाइलें
बर्रा थाना प्रभारी पुलिस की अपील देखने के लिए अभियोजन कक्ष के रिकॉर्ड रूम पहुंचे, तो वहां पर इस मामले की फाइल ही नहीं मिली। इसके साथ ही थाने से भी दिनेश मर्डर केस की फाइल गायब मिली। यह माना जा रहा है कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने कोर्ट के बाबुओं से मिलकर अभियोजन कक्ष से फाइल गायब करा दी। वहीं थाने में पुलिस से मिलकर थाने से भी फाइल गायब कराई जा चुकी है।
विकास पर थे 60 मुकदमे दर्ज
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर शहर के विभिन्न थानों में 60 मुकदमे दर्ज है। इनमें सबसे ज्यादा मुकदमे चौबेपुर और शिवली थाने में दर्ज है। सूत्रों के मुताबिक इसी तरह शहर के कई थानों से महत्वपूर्ण मुकदमों के दस्तावेज गायब हैं। इससे पता चलता है कि विकास की जड़ें कहां तक फैली हुई थीं।
सफेदपोश हैं विकास दुबे के राजदार
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने ग्रामीण क्षेत्र में अपनी राजनीति की जड़ों को मजबूत कर लिया था। इसके साथ ही वो अपनी छवि ब्राह्मणवादी नेता के तौर पर दिखाता था। एक बड़ा वोट बैंक विकास की मुट्ठी रहता था। लोकसभा, विधानसभा, निकाय चुनाव, ग्राम प्रधानी के चुनावों में बड़ी-बड़ी पार्टियों के प्रत्याशी विकास की कोठी पर दस्तक देने जाते थे। विकास चुनाव में प्रत्याशियों की मदद करता था और वोट दिलाता था।
पार्टी के नेता करते थे विकास की मदद
चुनाव जीतने के बाद पार्टियों के नेता विकास दुबे के सबसे बड़े मददगार बन जाते थे। यही सफेदपोश उसको असलहों के लाइसेस जारी कराने में मदद करते थे। राशन की दुकानों को अलॉट कराने में उसकी मदद करते थे, सफेदपोशों के संरक्षण में विकास की पुलिस विभाग में भी घुसपैठ कर ली थी, जिसका नतीजा है कि थानों से महत्वपूर्ण फाइलें गायब है।
सफेदपोश नेताओं का भरोसेमंद था विकास
विकास दुबे सफेदपोश नेताओं के ऐसे काम करता था जो कोई नहीं कर पाता था। रंगदारी वसूलने से लेकर जमीनों पर कब्जे का काम विकास के जिम्‍मे रहता था। इससे होने वाली मोटी कमाई में विकास भी हिस्सेदार रहता था।