बाजे-गाजे के साथ निकाली पालतू कुतिया 'पुष्पा' की शवयात्रा, तेरहवीं में कार्ड छपवा पूरे गांव को दी दावत



  • मेरठ के एक गांव में एक अनोखी तेरहवीं भोज का आयोजन हुआ

  • किसान ने अपनी पालतू कुतिया की मौत के बाद गांववालों को दी दावत

  • मौत के बाद जानवर का अंतिम संस्‍कार भी किया गया, अस्थि विसर्जन भी

  • 13 ब्राह्मणों को ब्रह्मभोज के बाद दक्षिणा देकर विदा किया गया


मेरठ। उत्तर प्रदेश में मेरठ के बाढ़म गांव में एक किसान ने अनोखी तेरहवीं भोज का आयोजन किया है। दरअसल, यह किसी इंसान की मौत की तेरहवीं नहीं थी बल्कि अपनी पालूत कुतिया 'पुष्पा' की मौत के बाद किसान ने शुक्रवार को पूरे गांव को दावत दी। ग्रामीणों को बाकायदा तेरहवीं कार्ड भी बांटा गया था। किसान योगेश त्‍यागी को अपनी कुतिया से इतना लगाव था कि उन्‍होंने श्मशान घाट में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार ढोल-बाजे के बीच उसका अंतिम संस्कार किया था। 'पुष्पा' की अस्थियों को चुनकर बृजघाट में विसर्जन भी किया गया। यह भोज पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पूरा मामला बाढ़म गांव का है। यहां रहने वाले योगेश त्यागी पेशे से किसान हैं। योगेश की पालतू कुतिया 'पुष्पा' की गत 12 अक्टूबर को मौत हो गई थी। 6 सालों से इस घर में रह रही 'पुष्पा' परिवार की सदस्‍य जैसी बन गई थी। लिहाजा योगेश ने 'पुष्पा' की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार भी परिवार के किसी सदस्य की तरह ही किया। योगेश और क्षेत्र के अन्य ग्रामीणों ने ढोल-बाजे के साथ 'पुष्पा' की शव यात्रा निकाली।
13 ब्राह्मणों को ब्रह्मभोज और दक्षिण भी
योगेश के परिवार ने अपने इस दुख में शामिल होने वाले ग्रामीणों को धन्यवाद देने के लिए भी अनोखा रास्ता अपनाया। योगेश ने 'पुष्पा' की तेरहवीं के लिए बाकायदा कार्ड छपवा कर पूरे गांव में बांटे। शुक्रवार को 'पुष्पा' की तेरहवीं के मौके पर योगेश के घर में सुबह शांति यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें परिवार के सदस्यों सहित गांव के अन्य लोगों ने भी आहुति देते हुए 'पुष्पा' की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। शांति यज्ञ के बाद हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार 13 ब्राह्मणों को ब्रह्मभोज कराते हुए उन्हें दक्षिणा आदि देकर विदा किया गया।
भोज में पूरी-खीर और रायता
इस अनोखी तेरहवीं की दावत में सैकड़ों ग्रामीणों शामिल हुए। दावत के लिए योगेश और उनके परिवार ने आलू, पूरी, खीर और रायते का इंतजाम किया था। इस मामले में योगेश त्यागी का कहना है कि चाहे इंसान हो या जानवर, किसी के प्रति प्रेम को प्रदर्शित करने का कोई पैमाना नहीं है। उन्‍होंने अपनी 'पुष्पा'का हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार क्रिया कर्म कर अन्‍य सभी जरूरी रस्‍में निभाई हैं।