भिवंडी हादसाः थाने से लेकर शवगृह तक, दो साल के बेटे को तलाश रहा पिता


ठाणे। बदहवाश शब्बीर कुरैशी मलबे में कुछ खोज रहे थे। यह तीसरी बार था, जब वह मलबा खोदकर कुछ तलाश रहे थे। यह मलबा था भिवंडी की उस इमारत का जो बीते दिनों धराशाई हो गई थ। इस इमारत के मलबे में दबकर 41 लोगों की मौत हो गई थी। 25 लोग घायल हो गए थे। शब्बीर ने इस हादसे में अपनी पत्नी परवीन और उनकी चार साल की बेटी मरियम को खो दिया। उनकी लाश मलबे से बरामद हो गई थी लेकिन शब्बीर का दो साल के बेटे का अभी तक कुछ पता नहीं चला है। वह मलबे में अपने बेटे को तलाशते हैं। 21 सितंबर क सुबह जब जिलानी बिल्डिंग भरभराने लगी तो परवीन (30) उन लोगों में शामिल थी जिन्होंने सबसे पहले, सभी लोगों को अलर्ट किया। दंपती ने शोर मचाते हुए लोगों के बिल्डिंग से बाहर भागने को कहा। अपने चारों बच्चों को खुद लेकर बाहर भागे। परवीन अपना बुर्का लेने के लिए मूसेब और मरियम को लेकर वापस अंदर गई और वैसे ही चार मंजिला इमारत ढह गई।
80 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान नहीं मिला शव
कुरैशी ने कहा कि उसके दो बेटे शाहिद और शादिक उसके पास हैं। अगले दिन परवीन और मरियम का शव मलबे से बरामद हो गया लेकिन मुसेब का शव नहीं मिला। 80 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी न तो वह जिंदा मिला, न ही उसका शव। कुरैशी ने बताया कि वह पास में ही अपने भाई शौकत के पास अस्थाई निवास में रह रहे हैं। वह मलबे के पास आते हैं और इस उम्मीद में मलबा खंगालते हैं कि शायद उनके बेटे का शव ही उन्हें मिल जाए। वह रोज पुलिस स्टेशन, पोस्टमॉर्टम हाउस, भिवंडी-निजामपुरा सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के दफ्तर के चक्कर काटते हैं। उन्होंने कहा कि मलबे को पूरी तरह से खोजा जा चुका है लेकिन बेटे का नामोनिशान नहीं मिला। उन्हें लगता है कि उनका बेटा जिंदा है।
तीन दिन पहले भी करवाई खुदाई
तीन दिन पहले महापालिका ने जब बिल्डिंग का बचा भाग गिराया, वह तब भी वहां उम्मीद लेकर गए थे। वहां पर उन्होंने जेसीबी वाले से प्रार्थना की और एक बार फिर से मलबे को खुदवाया। जेबीसी ने लगभग 6 फीट गहरे तक खुदाई की लेकिन तब भी मुसेब का कुछ पता नहीं चला। अधिकारी इस बात से भी इनकार कर रहे हैं कि गलती से किसी और को शव नहीं दिया गया है।