गाजियाबाद की फैक्ट्री में बन रहा था नकली N-95 मास्क, मुंबई पुलिस ने मारा छापा



  • गाजियाबाद की फैक्ट्री में बनाया जा रहा था नकली एन-95 मास्क

  • मुंबई पुलिस का छापा, फैक्ट्री से 5 हजार घटिया मास्क किए जब्त

  • 11 लाख रुपये की एक प्रिंटिंग मशीन और दो प्रिंटिंग स्क्रीन बरामद

  • कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एन-95 मास्क की काफी डिमांड


प्रेम प्रकाश त्रिपाठी,(गाजियाबाद)। कोरोना काल में बार-बार मास्क और दो गज की दूरी को जरूरी कहा जा रहा है। यूपी के गाजियाबाद में एक फैक्ट्री के अंदर नकली एन-95 मास्क बनाया जा रहा था। मुंबई पुलिस ने यहां छापा मारकर एक शख्स को गिरफ्तार किया है। फैक्ट्री के अंदर से 5 हजार घटिया एन-95 मास्क जब्त किए गए हैं। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक फैक्ट्री पर छापा मारा। यहां नकली एन-95 मास्क बनाया जा रहा था। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद से एन-95 मास्क की काफी मांग है। एक अधिकारी ने बताया कि अपराध शाखा की यूनिट-3 ने पहले गिरफ्तार किए गए एक व्यक्ति से मिली जानकारी के बाद बृहस्पतिवार को छापेमारी की। उन्होंने बताया कि छापे के दौरान, पुलिस ने 5,000 घटिया मास्क, 11 लाख रुपये की एक प्रिंटिंग मशीन और दो प्रिंटिंग स्क्रीन जब्त की। उन्होंने बताया कि इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी ने बताया कि उसे ट्रांजिट रिमांड पर शहर लाया गया और यहां की एक अदालत ने उसे दो नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
क्या है एन-95 मास्क
N-95 रेस्पेरेटर्स एक पीपीई है। इसे पहनने वाला शख्स हवा में तैर रहे पार्टिकल और तरल पदार्थों को चेहरे पर जाने से बचाने में इस्तेमाल करता है। इसके जरिए छोटे पार्टिकल और बड़े पार्टिकल को नाक के अंदर जाने से रोका जा सकता है। इस मास्क का डिजाइन हेल्थ केयर वर्कर्स और कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले वर्कर के लिए किया गया है।
किस तरह के N-95 Respirators मास्क से बचना चाहिए?
वैसे N-95 Respirators जिसमें एक खास तरह का वॉल्व लगा होता है। यह उतना लाभदायक नहीं होता है, जितना आपको बताया जाता है। ऐसे मास्क या जिनकी ओपनिंग सामने की तरफ हो। यानी जिसका वन वे वॉल्व हो उसे भी पहनने से बचना चाहिए। ये मास्क आपकी तरफ आने वाले छोटी बूंदों से नहीं बचाते हैं। इसलिए ऐसे मास्क पहनना ठीक नहीं।
तो किस तरह के मास्क पहनने चाहिए?
केंद्र सरकार ने अप्रैल में एक एडवाइजरी जारी की थी। केंद्र सरकार की राज्यों को लिखी इस चिट्ठी ने लोगों को चौंका दिया था। केंद्र की चिट्ठी में कहा गया था कि छिद्रयुक्त N-95 मास्क से कोरोना वायरस नहीं रुकने वाला है। केंद्र ने सलाह दी थी कि मुंह को ढकने वाले मास्क पहनें। लोगों को कॉटन के कपड़े के बने मास्क पहनने को कहा गया था। इसके अलावा मास्क को हर दिन धोने की भी सलाह दी गई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक राजीव गर्ग ने राज्यों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मामलों के प्रधान सचिवों को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा कि ऐसा सामने आया है कि अधिकृत स्वास्थ्य कर्मियों की जगह लोग एन-95 मास्क का ‘अनुचित इस्तेमाल’ कर रहे हैं। लेकिन इस मास्क से वायरस नहीं रुकता है। इसके मद्देनजर मैं आपसे आग्रह करता हूं कि सभी संबंधित लोगों को निर्देश दें कि वे फेस/माउथ कवर के इस्तेमाल का पालन करें और एन-95 मास्क के अनुचित इस्तेमाल को रोकें।