लोकल में सफर पर उद्धव सरकार की शर्तें, रेलवे की उलझन,56 लाख यात्रियों पर संकट!



  • शर्तों के साथ सामान्य यात्रियों को लोकल ट्रेनों में अनुमति देने की सरकार की मांग के बाद रेलवे का जवाब

  • मुंबई में लॉकडाउन से पहले रोजाना कुल 3,141 सर्विस चलती थीं, इनमें करीब 80 लाख यात्री सफर करते थे

  • पीक आर्स में 4,500 यात्री प्रति लोकल चलते थे, जबकि 12 डिब्बों की एक लोकल की क्षमता 1,200 यात्री है


कांती जाधव,(मुंबई)। शर्तों के साथ सामान्य यात्रियों को लोकल ट्रेनों में अनुमति देने की महाराष्ट्र सरकार की मांग के बाद रेलवे ने अपना जवाब तैयार किया है। जवाब के अनुसार, मुंबई में लॉकडाउन से पहले रोजाना कुल 3,141 सर्विस चलती थीं। इनमें करीब 80 लाख यात्री सफर करते थे। औसतन 2,546 यात्री प्रति लोकल का आंकड़ा था। वहीं, पीक आर्स में करीब 4,500 यात्री प्रति लोकल चलते थे, जबकि 12 डिब्बों की एक लोकल की क्षमता करीब 1,200 यात्री की होती है। कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग की शर्तों को पालने के लिए प्रति लोकल केवल 700 यात्री ही ट्रैवल कर सकते हैं। इस शर्त को यदि बरकरार रखना होगा, तो करीब 56 लाख यात्रियों के लिए यात्रा का संकट पैदा होने वाला है।
संभव नहीं वर्गीकरण
रेलवे के अधिकारी ने बताया कि अब यदि 24 लाख यात्रियों को अनुमति दी जाए, तो किसे चुनना है और किसे छोड़ना है, यह फैसला भी राज्य सरकार को ही करना होगा। अधिकारी ने एक आंकड़ा देते हुए समझाया कि अगर मुंबई में सभी कर्मचारियों को ही यात्रा की अनुमति दे दी जाए, तो भी 15-16 लाख हो जाएंगे। लॉकडाउन से पहले करीब 20 लाख महिलाएं रोजाना ट्रैवल किया करती थीं, यदि इससे आधी भी शुरू हो जाएं, तो भी सरकारी कर्मचारियों को मिलाकर आंकड़ा 24 लाख के पार चला जाएगा। रेलवे के अनुसार, राज्य सरकार ने 15 जून से जब अतिआवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए ट्रेनें बहाल करने की मांग की थी, तब एक सप्ताह में सभी यात्रियों को QR code देने का वादा किया था। यह काम आज तक पूरा नहीं हुआ है।
टिकटिंग के लिए चाहिए वैकल्पिक व्यवस्था
रेलवे ने बताया कि सामान्य यात्रियों को अनुमति देने के बाद बुकिंग खिड़कियों पर उलझनें बढ़ सकती हैं। इसीलिए एटीवीएम, यूटीएस मोबाइल ऐप इत्यादि के माध्यम से भी टिकट वितरण शुरू करने होंगे। रेलवे ने कहा कि इन वैकल्पिक टिकटिंग व्यवस्थाओं में यात्रियों के वर्गीकरण का कोई विकल्प नहीं होता है, इसलिए टिकटिंग व्यवस्था को लेकर भी फिलहाल संशय दूर करने की जरूरत है।
महिला यात्रियों के लिए व्यवस्था
रेलवे ने जवाब में लिखा कि लॉकडाउन से पहले लोकल की कुल क्षमता का 23 फीसद हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित था। मौजूदा 1,410 सर्विस में भी यही अनुपात कायम रखा गया है। रेलवे ने तर्क दिया कि यदि राज्य सरकार की प्रति घंटे महिला विशेष ट्रेन की मांग को पूरा किया गया, तो प्लैटफॉर्म पर स्थितियां नियंत्रण से बाहर चली जाएंगी। मसलन, यदि स्टेशन पर महिलाएं अपनी लोकल का इंतजार कर रही हों और पुरुष यात्री अगली ट्रेन के लिए खड़े हों, तो इस स्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग कायम ही नहीं रह सकती। इसीलिए, महिलाओं के लिए मौजूदा व्यवस्था को ही अपनाना होगा।