अलादीन का चिराग जिससे डॉक्‍टर साहब के ढाई करोड़ हो गए छूमंतर



  • मेरठ में आयुर्वेद डॉक्‍टर को ठगों ने बनाया शिकार, ऐंठ लिए 2.62 करोड़ रुपये

  • 'अलादीन का चिराग' बेचने का सब्‍जबाग दिखाया, झांसे में आ गया डॉक्‍टर

  • चिराग से 'जिन्‍न' निकालकर दिखाते थे ठग, कई जिलों में फैला था जाल

  • इकरामुद्दीन और अनीस गिरफ्तार, पुलिस ने दर्ज किया धोखाधड़ी का केस


मेरठ। एक अलादीन था जिसे यह पता था कि उसके पास जो चिराग है, उसे रगड़ने पर जिन्‍न प्रकट होता है। एक मेरठ के डॉक्‍टर लईक अहमद हैं जिन्‍हें हाल ही में ये पता चला है कि 'अलादीन के चिराग' को रगड़ने से ढाई करोड़ रुपये गायब भी हो जाते हैं। हैरान होने की बात नहीं। डॉ. लईक के हाथ जो चिराग लगा है, वैसा तो अलादीन को भी नहीं मिला था। इस चिराग की 'जादुई ताकतों' ने डॉ. लईक और उनकी पत्‍नी को दीवाना सा कर दिया था। अगर आपको अलादीन की कहानी याद हो तो उसमें एक गुफा के भीतर अलादीन को चिराग के जिन्‍न के बारे में पता चलता है। डॉक्‍टर साहब को भी जिन्‍न का पता चला, लेकिन अपने ही घर में। अलादीन की कहानी सदियों पुरानी हैं। बचपन में सुनते थे और सोचते थे कि क्‍या सच में ऐसा हो सकता है। बालमन तो किसी भी चीज को संभव मानता है, शायद डॉक्‍टर साहब के भीतर का बच्‍चा भी सालों की पढ़ाई को किनारे कर 'अलादीन का चिराग' पाने की कोशिश में था। लालच में इंसान को फुसलाना बड़ा आसान हो जाता है। डॉक्‍टर साहब के साथ भी यही हुआ। इकरामुद्दीन ने उनसे कहा क‍ि उसके पास एक 'जादुई चिराग' है। करीब 5 किलो सोने का बना है और उसके भीतर एक जिन्‍न रहता है। डॉक्‍टर साहब को लगा कि सब अरमान पूरे करने का इससे बढ़‍िया रास्‍ता तो अब नहीं मिलेगा। इकरामुद्दीन भी बड़ी पहुंची हुई चीज था। उसने 'चिराग' के ऐसे 'जादू' दिखाए कि डॉक्‍टर साहब लट्टू हो गए। मतलब सोचिए, कोई शख्‍स आपसे 5 लाख रुपये ले और बदले में 7 लाख दे तो मन में लालच नहीं उपजेगा? एकाध बार तो उन्‍होंने कहीं और पैसा गाड़कर खोद लाने के लिए भी कहा। यही नहीं, अपने साथी अनीस के जरिए इकरामुद्दीन ने 'जिन्‍न' को भी प्रकट कर दिया था। बस होता ये था कि जिन्‍न कोई और नहीं, इकरामुद्दीन ही बनता था। इससे डॉक्‍टर लईक को लगा कि जरूर 'चिराग' में कोई रूहानी ताकत है। ग से 'जिन्न' निकाल करोड़ों की ठगीक्‍टर साहब को इकरामुद्दीन के मुंह से निकलती बातें उस वक्‍त किसी आकाशवाणी की तरह लग रही होंगी। वैसे डॉक्‍टर लईक ने आयुर्वेद की पढ़ाई की है। लंदन-वंदन में भी रहे हैं और बताते हैं कि इकरामुद्दीन की मां का इलाज भी उन्‍होंने ही किया था। बहरहाल, चिराग तो उनको चाहिए ही था मगर इकरामुद्दीन बेचना नहीं चाहता था। फिर किसी तरह बात बनी और डॉक्‍टर साहब ने किश्‍तों में 2.62 करोड़ रुपये इकरामुद्दीन और उसके एक साथी अनीस को दिए। मगर इकरामुद्दीन की एक शर्त थी। उसने कहा कि चिराग को दो साल के लिए बंद करके रखना पड़ेगा नहीं तो घर में कुछ दुर्घटना हो जाएगी। वक्‍त तो दो साल का था लेकिन लालची मन कहां मानता है। डॉक्‍टर साहब ने सोचा कि जिन्‍न को बुलाकर देखा जाए। उन्‍होंने 'चिराग' पर पत्‍थर घिसना शुरू किया, लेकिन ये क्‍या... जिन्‍न का तो कोई नामोनिशान नहीं था। डॉक्‍टर साहब ने फिर चिराग को घिसा...इस बार दूसरी तरफ से। मगर नतीजा वही। अब डॉक्‍टर लईक को विज्ञान की वो सारी कक्षाएं याद आने लगी थीं जिनमें अंधविश्‍वास से दूर रहने को कहा गया था। यह वो वक्‍त था जब उन्‍हें पता लग रहा था कि उन्‍हें इस चिराग से जिन्‍न नहीं, सिर्फ धोखा मिला है। फिलहाल ये 'जादुई चिराग' पुलिस के कब्‍जे में हैं और वो पत्‍थर भी जिसे चिराग पर घिसने से 'जिन्‍न' प्रकट होता है। डॉक्‍टर लईक की नजर में 'फरिश्‍ता' रहे इकरामुद्दीन और अनीस भी सलाखों के पीछे हैं। धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज हो गया है लेकिन पुलिस कह रही है कि इन दोनों ने मिलकर कितनों को ये 'जादुई चिराग' बेचने की कोशिश की है, इसका पता लगा रहे हैं। डॉक्‍टर लईक इकलौते नहीं, इनके शिकार कई हुए और अलग-अलग जिलों में हुए। पुलिस अब बैंक खाते खंगाल रही है ताकि पता चल सके और किस-किसको अपने 'चिराग' से 'जिन्‍न' निकलने का इंतजार है।