निकिता हत्याकांड: जेल में भी वीआईपी सुविधा लेना चाहता है आरोपी तौसीफ


फरीदाबाद। निकिता हत्याकांड में मुख्य आरोपी तौसीफ गिरफ्तारी के बाद से ही वीआईपी ट्रीटमेंट के खेल में लग गया है। बृहस्पतिवार से नीमका जेल में बंद तौसीफ ने रिमांड के बाद की पहली पेशी में ही जान का खतरा बताकर खुद को गुरुग्राम के भोंडसी जेल में शिफ्ट करने की अर्जी कोर्ट में दी थी, तौसीफ की यह अर्जी परिवार के राजनीतिक संबंध का लाभ लेने की उम्मीद से कम नहीं। चूंकि, इसी जेल में कांग्रेसी नेता का बेटा डिप्टी जेलर के पद पर कई साल से सेवाएं दे रहा है। राजनीतिक रसूख के बावजूद खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हत्यारोपी तौसीफ को यह विश्वास ही नहीं कि वह जेल की हवा भी खा सकता है। दो साल पहले हुए अपहरण कांड में मामला रफा-दफा हो जाने के बाद से ही उसके हौसले बुलंद हो गए थे। अब निकिता की हत्या को अंजाम देने के बाद उसकी तुरंत गिरफ्तारी से वह घबराया जरूर है लेकिन हिम्मत में कोई कमी नहीं है। इसलिए उसने न्यायालय में अर्जी लगाकर खुद को गुरुग्राम स्थित भोंडसी जेल में शिफ्ट करने की अपील की। दरअसल, भोंडसी जेल में उसे अपने राजनीतिक संबंध का लाभ उठाने की उम्मीद है। हथीन से कांग्रेस के विधायक रहे चौधरी जलेब खान के छोटे बेटे साजिद खान भोंडसी जेल में डिप्टी जेलर हैं। जलेब खान से तौसीफ के परिवार के साथ अच्छे संबंध हैं। निकिता हत्या मामले में पीड़िता के परिवार की तरफ से वकील व निकिता के मामा एदल सिंह रावत ने बताया कि उन्हें नायब कोर्ट के माध्यम से जानकारी मिली है कि तौसीफ ने न्यायालय में अर्जी लगाकर खुद की जान को खतरा बताते हुए उसे गुरुग्राम की भोंडसी जेल में शिफ्ट करने की मांग की है।साजिद की ज्यादातर नौकरी भोंडसी जेल में ही रही है। सरकार कोई भी हो साजिद वहीं बने रहते हैं। जलेब खान के बड़े बेटे इजराइल ने साल 2019 में हथीन से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उस समय भी पूर्व मंत्री और कांग्रेस के नूंह से मौजूदा विधायक आफताब अहमद के परिवार ने इजराइल की काफी मदद की थी। इसका विरोध करते हुए निकिता का परिवार न्यायालय से उसकी मांग नहीं मानने की अपील करने की तैयारी में है। तौसीफ के पास जान के खतरे की बात का कोई आधार ही नहीं है। मृतक निकिता का परिवार बेहद साधारण है। उसका किसी तरह का कोई संबंध जेल प्रशासन या अन्य महकमे में नहीं है। न ही यह कोई गैंगवार या लड़ाई झगड़े का मामला है जिससे उसे जेल में बंद किसी कैदी से ही खतरे की बात कही जा सके।