रिपब्लिक डे परेड में शामिल होने दिल्‍ली आए करीब 150 सैनिक कोरोना पॉजिटिव, कैंट में क्‍वारंटीन


  •  हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर होती है परेड
  • कोरोना महामारी के बावजूद अगले साल परेड की चल रहीं तैयारी
  • हजारों सैनिक दिल्‍ली पहुंचे थे, उनमें से करीब 150 मिले पॉजिटिव
  • दिल्‍ली कैंट में किए गए क्‍वारंटीन, लगभग सभी बिना लक्षण वाले
नई दिल्‍ली ब्यूरो। गणतंत्र दिवस और सेना दिवस पर परेड में हिस्‍सा लेने के लिए दिल्‍ली पहुंचे करीब 150 सैनिक कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं। सेफ बबल में भेजने से पहले इन सैनिकों का टेस्‍ट हुआ था और उनमें से कुछ पॉजिटिव मिले हैं। द हिंदू ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि लगभग सभी एसिम्‍प्‍टोमेटिक हैं। पॉजिटिव मिले सैनिकों को दिल्‍ली छावनी में क्‍वारंटीन किया गया है। ये सैनिक उन कुछ हजार सैनिकों में से हैं जिनका टेस्‍ट हुआ था। ऐसी स्थिति में सुरक्षित तरीके से परेड आयोजित कराने के लिए जरूरी प्रोटोकॉल तय कर दिए गए हैं। हर साल दिसंबर में हजारों सैनिक दिल्‍ली आते हैं। गणतंत्र दिवस और सेना दिवस पर होने वाली परेड्स में हिस्‍सा लेते हैं। कोविड महामारी के बावजूद अगले साल 26 जनवरी को राजपथ पर परेड की तैयारी हो रही है। भारत ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को गणतंत्र दिवस 2021 समारोह का मुख्‍य अतिथि बनने का न्‍यौता भेजा है। वह यूके में नए कोविड स्‍ट्रेन के बावजूद भारत आ रहे हैं, विदेश मंत्रालय इसकी पुष्टि कर चुका है।
27 साल बाद ब्रिटिश पीएम होंगे चीफ गेस्‍ट
जॉनसन के पिछले साल कार्यभार संभालने के बाद यह उनकी पहली बड़ी विदेश यात्रा होगी। अपनी भारत यात्रा को लेकर बोरिस ने कहा है कि "अगले वर्ष की शुरुआत में भारत की यात्रा को लेकर मैं बहुत ही खुश हूं।" यह 27 साल के अंतराल के बाद होगा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री अगले महीने भारत के 70वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे। इससे पहले 1993 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉन मेजर ने नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया था।
इस साल बोलसोनारो थे मुख्‍य अतिथि
गणतंत्र दिवस 2020 के लिए भारत ने ब्राजील के राष्‍ट्रपति जेयर बोलसोनारो को मुख्‍य अतिथि बनाया था। ऐसा तीसरी बार था जब ब्राजील के किसी राष्ट्राध्यक्ष ने गणतंत्र दिवस परेड की शोभा बढ़ाई। इससे पहले वर्ष 1996 और वर्ष 2004 में ब्राजील के राष्ट्रपति यहां इस मौके पर आए थे। हर साल समारोह के दौरान दुनिया को सैन्‍य पराक्रम के साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता देखने का भी मौका मिलता है।