फैक्ट्री में आग, सिरिंज से खून निकाल कार पर लगाया, 20 लाख के बीमा के लिए बिजनेसमैन ने किया ड्रामा


  • फैक्ट्री में आग और व्यापारी के लापता होने के मामले में शाजापुर पुलिस ने किया खुलासा
  • व्यापारी ने खुद ही लगाई थी अपनी फैक्ट्री में आग
  • सिरिंज से खून निकाल व्यापारी ने कार पर लगाया था
  • पुलिस ने व्यापारी को भोपाल से किया है बरामद
शाजापुर। शुजालपुर के अकोदिया नाका इंडस्ट्रियल एरिया में प्रिंटिंग यूनिट में आग लगने के बाद लापता व्यापारी पराग ने खुद की मौत की साजिश रची थी। उसने फैक्ट्री में आग लगाने के बाद सिरिंज से अपना खून निकाल अपनी कार पर लगाया था। ताकि उसे संभवित मृत मान 20 लाख का बीमा क्लेम मिलने से कर्ज से राहत मिल सके। घटना सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था। मंत्री और एसपी खुद मौके पर मुआयना के लिए गए थे। 50 पुलिसकर्मियों की टीम इस केस की जांच कर रही थी। 120 घंटे के अंदर 150 से अधिक लोगों से पूछताछ हुई थी। साथ ही पुलिस 3 राज्यों में भी पूछताछ के लिए गई थी। अब पुलिस ने इस केस से पर्दा उठा लिया है। बीते गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात अकोदिया नाका स्थित पराग प्रिंटिंग प्रेस में आग लगने की सूचना उनके परिजनों ने सुबह पुलिस को दी थी। जिस पर शुक्रवार से लेकर मंगलवार तक पुलिस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश तीन राज्यों में अलग-अलग दल भेजने के साथ ही 50 पुलिसकर्मियों के साथ स्थानीय स्तर पर भी जांच की जा रही थी। मामले को सुलझाने के लिए 5 टीआई की टीम ने काम किया।
खुद लगाई थी फैक्ट्री में आग
एसडीओपी वीएस द्विवेदी ने पराग को मीडिया के सामने पेश करते हुए जानकारी दी कि पराग ने खुद अपनी फैक्ट्री में आग लगाई थी। आग लगाने के कुछ समय बाद ही वापस अपनी विस्टा कार लेकर फैक्ट्री पर आया और सीसीटीवी कैमरे की स्टोरेज डिवाइस डीवीआर निकाल कर ले गया। इसके बाद वह श्यामपुर के रास्ते भोपाल पहुंचा और अपनी कार एमपी नगर में खड़ी कर वहां से बस से उदयपुर चला गया। यहां से उसने अपनी महिला रिश्तेदार से संपर्क किया और उसे साथ ले जाकर मथुरा उसके माता-पिता के घर छोड़ दिया और वापस बस से भोपाल आ गया। दरअसल, पुलिस पराग की महिला रिश्तेदार से पराग के उदयपुर पहुंचने से पहले ही फोन पर संपर्क कर चुकी थी और उस महिला ने यह बात पराग को बता दी थी। जिससे पराग को लगा कि पुलिस उसे लगातार ट्रैक कर रही है और वह वापस भोपाल आ गया।
20 लाख के बीमा के लिए किया ये सब
पुलिस के मुताबिक पराग ने बताया कि उसने 20 लाख रुपए का बीमा कराया था, जिसे पाने के लिए वह खुद को लापता या संदिग्ध मृत बताकर अपने व्यापार संबंधी कर्ज से मुक्त होने के लिए उसने यह कहानी रची थी। भोपाल से एक लाख आठ हजार पांच सौ रुपये औ कार के साथ लाकर पुलिस ने पराग को परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस के अनुसार पराग पर 35 लाख रुपये का कर्ज है।