गाजियाबाद में प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर सॉल्वर गैंग बेनकाब, सरगना समेत 5 अभियुक्त गिरफ्तार


गाजियाबाद ब्यूरो। पुलिस ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने और नौकरी लगवाने वाले साल्वर गैंग को बेनकाब कर सरगना समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गैंग में शामिल लोग प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदक के स्थान पर बैठकर पेपर हल करते थे। इसके बदले में वह आवेदकों से मोटी रकम वसूलते थे। गैंग का सरगना राजनारायण प्रताप सिंह उर्फ जूली है। उसने बीटेक की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में फर्जी नियुक्ति पत्र, विभिन्न विभागों की फर्जी मुहरें, आधार व पैन कार्ड, युवकों की गिरवी रखी असली मार्कशीट, फोटो, एटीएम कार्ड, चेकबुक, लैपटॉप और प्रिंटर बरामद हुए हैं। पुलिस के मुताबिक गैंग केन्द्र व राज्य सरकार की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से परीक्षा में पास कराने और सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर करोड़ों रुपये ठग चुका है। एसपी सिटी अभिषेक वर्मा ने बताया कि फिरोजाबाद के गांव चमरौली निवासी राजनारायण प्रताप सिंह उर्फ जूली (27), गांव नगला निवासी राजदीप, सिरसागंज निवासी राहुल, अरोज निवासी सुरेन्द्र उर्फ छोटे तथा फर्रुखाबाद के गांव देवसैनी निवासी कुलदीप को गिरफ्तार किया गया है। राजनारायण उर्फ जूली गैंग का सरगना है और गैंग में पेपर साल्वर की भूमिका निभाता है। जूली एनआईटी भोपाल से आईटी में बीटेक कर रहा था, लेकिन उसने सेकेंड ईयर में ही बीटेक की पढ़ाई छोड़ दी थी। जिसके बाद वह ठगी का धंधा करने लगा। वहीं, सुरेन्द्र उर्फ छोटू पेपर स्कैनिंग का एक्सपर्ट है। वह परीक्षार्थियों से पेपर सॉल्वर की फोटो ऐसे मैच कर देता है कि परीक्षा केंद्र के निरीक्षक भी उसे आसानी से पहचान नहीं पाते थे। वह हर तरह के फर्जी दस्तावेज बनाने का माहिर है। आरोपी राजदीप, कुलदीप व राहुल 12वीं पास हैं और वह देश के विभिन्न राज्यों के बेरोजगार युवकों को सरकारी नौकरी का लालच देकर फंसाने का काम करते थे।
दिल्ली-एनसीआर के छात्र और परीक्षार्थी निशाने पर
पुलिस के मुताबिक गैंग दिल्ली-एनसीआर में पीजी में रहने वाले और केन्द्र व राज्य सरकार की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को अपना निशाना बनाता था। परीक्षा पास कराने और सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलता था। लाखों रुपये की डील तय होने पर परीक्षार्थियों की जगह पेपर सॉल्वर का फर्जी आधार कार्ड और एडमिट कार्ड बनाने के नाम पर उनसे कुछ रकम एडवांस ले ली जाती थी। बाकी रकम परीक्षा पास के बाद देने की बात कहकर आरोपी युवाओं का भरोसा जीत लेते थे। गैंग के सदस्य टारगेट पर आए युवाओं की मुलाकात अपने सरगना जूली से कराते थे। जूली उन्हें खुद को योग्य बताकर परीक्षा पास करने की गारंटी देता था।
छात्रों की मार्कशीट गिरवी रख लेता था गैंग
सीओ प्रथम अभय कुमार मिश्र ने बताया कि परीक्षा के बाद रकम देने में कोई आनाकानी न करे, इसके लिए गैंग परीक्षार्थी की मार्कशीट अपने पास गिरवी रख लेता था। काम होने पर तय रकम वसूलने के बाद जमा किए गए दस्तावेज वापस कर दिए जाते थे। आरोपियों के कब्जे से विभिन्न राज्यों के दर्जनों युवाओं की असली मार्कशीट बरामद हुई हैं इससे साफ है कि गैंग का जाल कई राज्यों में फैला हुआ था। सीओ ने बताया कि गिरोह के कुछ सदस्य पूर्व में आगरा पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं, लेकिन सरगना जूली फरार हो गया था। वह आगरा पुलिस का वांछित था।
फेल होने पर फर्जी नियुक्ति पत्र थमा देते थे
बताया जा रहा है कि पेपर सॉल्वर गैंग की मदद से कई युवा परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी पाने में कामयाब हो गए, लेकिन कुछ फेल भी हो गए थे। उन युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र थमाकर गैंग ने लाखों रुपये ऐंठ लिए। पुलिस का कहना है कि बीच-बीच में गैंग के सदस्य अपने मोबाइल नंबर बदल लेते थे उनका कोई स्थाई ठिकाना न होने के कारण पीड़ित युवा इन्हें नहीं खोज पाते थे। फिलहाल आरोपी नगर कोतवाली क्षेत्र के एक होटल में किराए पर कमरा लेकर रह रहे थे। अक्सर गैंग के सदस्य होटल या फिर सार्वजनिक स्थानों पर डील करते थे।
सीआईएसएफ के जवान की चल रही पड़ताल
आरोपियों के पास से रमेश फौजी के नाम का एक आईडी कार्ड भी मिला है। रमेश सीआईएसएफ का जवान बताया गया है। जो कुछ समय पूर्व गैंग के सरगना के संपर्क में आया था। बरामद कार्ड असली या फिर फर्जी, पुलिस इसकी भी तहकीकात करने में जुटी है। एसपी सिटी का कहना है कि आरोपियों का नेटवर्क पता करने के लिए पुलिस उनके मोबाइल की व्हाट्सएप चैटिंग व कॉल्स भी खंगाल रही है। फौजी की भूमिका मिलने पर उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।
बुलंदशहर के युवक की एफआईआर पर पकड़ा गया गैंग
पेपर सॉल्वर गैंग के खिलाफ खुर्जा देहात बुलंदशहर निवासी मयंक कुमार ने नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मयंक का कहना है कि बीते साल आरोपियों ने उसे रेलवे में टीसी के पद पर नौकरी लगवाने का भरोसा दिया था। चार लाख रुपये में डील तय की गई थी। आरोपियों ने उससे 2.50 लाख रुपये बतौर एडवांस और उसकी हाईस्कूल की मार्कशीट व अन्य मूल दस्तावेज ले लिए थे। कुछ दिनों बाद आरोपियों ने उसे फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया। जिसे लेकर वह लखनऊ स्थित डीआरएम दफ्तर पहुंचा तो उसे अपने साथ हुई ठगी के बारे में पता चला। मयंक का कहना है कि जब उसने आरोपियों से संपर्क कर अपनी रकम और दस्तावेज वापस मांगे तो आरोपियों ने उसे पहले दूसरी लगवाने का झांसा देना शुरू कर दिया और फिर उसे धमकी देनी शुरू कर दी। शिकायत में मयंक ने कई अन्य पीड़ितों के नाम का उल्लेख भी किया है।