गाजियाबाद में भुगतान के लिए मांगी रिश्वत, विजिलेंस जांच में फंसे निगम के अफसर


सूर्य प्रकाश,(गाजियाबाद)। नगर निगम के 10 अफसर और कर्मचारी विजिलेंस जांच में फंस गए हैं। निगम के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इन अफसर-कर्मचारियों पर दिल्ली की एक कंपनी का भुगतान करने के नाम पर कमीशन मांगने का आरोप है। मंगलवार को विजिलेंस की टीम नगर निगम मुख्यालय पहुंची और सैनिटरी इंस्पेक्टरों व कई अधिकारियों से पूछताछ कर बयान दर्ज किए। ऐसे में अब इन अफसरों-कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नई दिल्ली की फर्म मै. जितिन आनंद कंप्यूटर की ओर से नगर निगम के कूड़ाघरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। फर्म संचालकों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से काम करा लिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। भुगतान करने की एवज में निगम के कर्मचारी और अधिकारी मोटा कमीशन मांगते हैं। कमीशन न देने पर भुगतान रोक दिया गया था। फर्म की ओर से इसकी शिकायत उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) से की गई। इसमें स्टोर इंचार्ज मोहन कुमार, पूर्व प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी वीरेंद्र पाल शर्मा, सैनिटरी इंस्पेक्टर संजीव कुमार, अशोक कुमार, योेगेंद्र कुमार, नरेंद्र कुमार, सुनील कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी मिथिलेश कुमार, कोषाधिकारी अरुण कुमार मिश्रा और अपर नगरायुक्त प्रमोद कुमार पर आरोप लगाए गए हैं। फर्म की शिकायत के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने इनके खिलाफ खुली जांच शुरू कर दी है।
कर्मचारियों-अफसरों से हुई पूछताछ
मंगलवार को विजिलेंस की टीम नगर निगम मुख्यालय पहुंची थी। टीम ने जांच के दायरे में आए कई अधिकारियों, सैनिटरी इंस्पेक्टरों और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की। टीम ने उनके बयान भी दर्ज किए। यह पूछताछ गोपनीय तरीके से की गई। अभी कई लोगों से पूछताछ किया जाना बाकी है।
जांच में फंसे अफसरों-कर्मचारियों की सर्विस का मांगा रिकार्ड
इस मामले में जांच कर रही विजिलेंस की टीम ने जांच में फंसे अफसरों-कर्मचारियों की सर्विस का रिकार्ड मांगा है। उन्होंने 13 बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इसमें अधिकारी कर्मचारी का नाम, पिता का नाम, स्थायी पता, वर्तमान पता, पदनाम, नियुक्ति का स्थान, जन्मतिथि, सेवा में आने का दिनांक, सेवा का स्तर, आचरण नियमावली, रिटायरमेंट का दिनांक, पूर्व की नियुक्तियां, परिवार के सदस्यों का विवरण शामिल हैं।