गाजियाबाद में साठगांठ कर अवैध कॉलोनियों पर भी नगर निगम ने लगा दिया टैक्स


गाजियाबाद ब्यूरो। गाजियाबाद की सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां बस रहीं हैं। वहीं नगर निगम के कर्मचारी ने साठगांठ कर ऐसे भवनों पर हाउस टैक्स भी लगा दिया। लोहिया विहार और शांति नगर में ऐसे कई मामले सामने आए थे, अब मेरठ रोड स्थित कई मकानों पर टैक्स लगा दिया गया है। हाउस टैक्स लगाने का यह खेल पड़ोसी कॉलोनी के नाम पर किया गया है। दूसरी कॉलोनी का हिस्सा दर्शाकर इन मकानों पर हाउस टैक्स लगाया गया। गुलधर, गढ़ी सिकरोड के कई खसरा नंबरों की जमीनों पर भी लोगों ने कब्जा कर हाउस टैक्स का निर्धारण करा लिया है। आरकेजीआईटी कॉलेज के पास कई लोगों ने नगर निगम की जमीन कब्जाकर बाउंड्रीवॉल कर ली है। कई लोगों ने मकान बना लिए हैं। गुलधर में भी लोगों ने तालाब की करीब 200 वर्ग मीटर जमीन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। यहां भी नगर निगम ने हाउस टैक्स लगा दिया है।नगर निगम कर्मचारियों ने टैक्स निर्धारण इस तरह किया है कि पकड़ में न आ सके। मेरठ रोड स्थित सरकारी जमीनों पर बने भवनों पर नगर निगम कर्मचारियों ने विकास नगर कॉलोनी के नाम से हाउस टैक्स लगाया है, जबकि यह कॉलोनी इन भवनों से करीब दो किलोमीटर दूर है।
शांतिनगर-लोहिया विहार में भी लगाया कर
नंदग्राम से सटे लोहिया विहार और शांतिनगर में लोगों ने सरकारी जमीन पर मकान बना लिए हैं। नगर निगम ने यहां सरकारी जमीन पर बने 104 मकानों को चिह्नित किया था। इनमें से 11 मकानों को ध्वस्त कर दिया था। जांच में सामने आया कि इन मकानों पर हाउस टैक्स भी लगाया हुआ था। स्थानीय लोग टैक्स की इन्हीं रसीदों और रजिस्ट्री के आधार पर मकानों पर मालिकाना हक का दावा कर रहे थे, हालांकि निगम ने इन्हें नहीं माना और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी। हालांकि बाकी मकानों को नगर निगम नहीं तोड़ पाया है।
कॉलोनाइजर काटते हैं कॉलोनी, निगम करा देता है विकास
शहर में अवैध कालोनियों की बाढ़ सी आ गई है। करीब 250 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां शहर में हैं लेकिन इनमें अब सभी सुविधाएं मुहैया हैं। कॉलोनाइजर खेती की और सरकारी जमीनों पर प्लॉटिंग कर कॉलोनियां बसा देते हैं और नगर निगम इन कॉलोनियों में सड़क, सीवर, जल निकासी, पेयजल, स्ट्रीट लाइट समेत सभी सुविधाएं मुहैया करा देता है। यह कॉलोनियां जिन वार्ड में आती हैं, उनके पार्षद ऐसी अवैध कॉलोनियों में विकास कार्य कराने के लिए प्रस्ताव नगर निगम में भेजते हैं। अधिकांश मामलों में कॉलोनाइजर क्षेत्रीय पार्षदों से साठगांठ कर विकास कार्य करा लेते हैं और उनके लाखों रुपये बच जाते हैं। जबकि नगर निगम को ऐसी कॉलोनियों से टैक्स नहीं मिलता। पूर्व पार्षद मुकेश त्यागी ने कहा कि मेरठ रोड स्थित करीब पांच हजार वर्ग मीटर जमीन लोगों ने कब्जा रखी है। इनमें से जमीन के कुछ हिस्से पर बाउंड्रीवॉल कराकर घेराबंदी कर ली गई है और इस पर व्यावसायिक गतिविधि की जा रही है। अन्य जमीन पर भवन बन चुके हैं। नगर निगम ने इस सरकारी जमीन पर बने भवनों पर हाउस टैक्स लगा दिया है। इसके दस्तावेज मेरे पास भी हैं और नगर निगम के पास भी। कर्मचारियों की साठगांठ से सरकारी जमीनों पर बने मकानों पर टैक्स लगाने का खेल चल रहा है। ऐसे मामले जब कोर्ट में जाते हैं तो नगर निगम का दावा कमजोर हो जाता है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि सरकारी जमीन पर बने भवनों पर टैक्स लगने की शिकायत मिली है। इस प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।