उपराष्ट्रपति नायडू ने सेल्युलर जेल में बंदी स्वतंत्रता सेनानियों को लेकर श्रृंखला की शुरुआत की


नयी दिल्ली। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सेल्युलर जेल में बंदी बनाकर रखे गए स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी साझा करने को लेकर रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट की श्रृंखला की शुरुआत की। उन्होंने साथ ही कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की डायरी उनकी व्यक्तिगत मजबूती और मातृभूमि के प्रति उनके अपार स्नेह पर प्रकाश डालने में सहायक होंगी। ब्रिटिश शासन के दौरान राजनीतिक कैदियों को सेल्युलर जेल भेजा जाता था। अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में स्थित इस जेल को काला पानी के नाम से जाना जाता था। अपनी पहली सोशल मीडिया पोस्ट में नायडू ने विनायक सावरकर के बारे में लिखा, जोकि वीर सावरकर के नाम से मशहूर हैं। 
उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की गाथा कई महान एवं सामान्य पुरुषों एवं महिलाओं की वीर गाथाओं और देश को आजाद कराने के लिए उनके द्वारा किए गए निस्वार्थ बलिदान से पूरी होती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है और ऐसे में लोगों को ना केवल उनकी शहादत, वीरता और अदम्य भावना की प्रेरणादायक कहानियां दोबारा बताए जाने की आवश्यकता है बल्कि हमें अपने इतिहास के पन्नों में उन्हें उनका उचित स्थान देने की भी आवश्यकता है। हाल ही में उपराष्ट्रपति ने कई ऐसी स्वतंत्रता सेनानी महिलाओं की वीर गाथा के बारे में लिखा था, जिनके बारे में लोग बहुत अधिक नहीं जानते। नायडू ने कहा कि मैं विश्वास करता हूं कि देश के लोगों और खासकर युवाओं को ऐसे व्यक्तियों के बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने कहा कि सेल्युलर जेल के दौरे के दौरान उन्हें बताया गया कि स्वतत्रंता सेनानियों को किस तरह जेल में जबरदस्त यातनाएं दी जाती थीं। नायडू ने लिखा कि बटुकेश्वर दत्त, दीवान सिंह कालेपानी , फज्ल-ए-हक खैराबादी और सावरकर बंधु गणेश एवं विनायक आदि उन स्वतंत्रता सेनानियों में शुमार थे जिन्हें देश को स्वतंत्रता कराने की उनकी भावना को नष्ट करने के लिए सेल्युलर जेल भेजा गया था।