सरकार को आपबीती सुनाएंगी किसानों की विधवाएं, तस्वीरों के साथ दिल्ली सीमा पर पहुंचीं

नयी दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए नए कृषि कानून के खिलाफ 'दिल्ली चलो' अभियान पंजाब के किसानों के साथ-साथ गैर-किसानों को भी आकर्षित कर रहा है। बता दें कि किसानों का यह आंदोलन 20 दिनों से लगातार जारी है। वो भी ऐसे समय में जब प्रकृति करवट बदल रही है और शीतलहर चल रही है और तमाम किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की सीमाओं में डटे हुए हैं। किसान संघ के नेताओं ने बताया कि वह 'एक परिवार से एक व्यक्ति' के आंदोलन में शामिल होने की नीति को अपना रहे हैं लेकिन लोग अपनी मर्जी से दिल्ली पहुंच रहे हैं। किसानों के 'दिल्ली चलो' अभियान में शामिल होने के लिए कई विधवाएं अपने पतियों की तस्वीरें लेकर निकलीं। यह वो विधवाएं हैं जिनके पतियों के कृषि संबंधी समस्याओं की वजह से आत्महत्या की थी। विधवाओं के अतिरिक्त परिवार के कई अन्य सदस्य भी इस अभियान में शामिल होने के लिए टिकरी सीमा के लिए निकले। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिला और तहसील इकाइयों को आत्महत्या करने वाले किसानों की लिस्ट तैयार करने का आदेश मिला है। इस लिस्ट में यह भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसानों ने आत्महत्या कब की थी, क्यों की थी और कैसे की थी। कृषि संगठन बीकेयू एकता उर्गान के उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठुके ने कहा कि सरकारें पंजाब में किसानों की अलग तस्वीर दिखा रहे हैं लेकिन हकीकत कुछ और है। पीड़ित परिवार अपनी आपबीती सुनाएंगे और हम चाहते हैं कि उनकी आवाज को सुना जाए। किसान संगठनों का दावा है कि पंजाब में हर साल हजारों किसान आत्महत्या करते थे लेकिन अधिकतर मामले दर्ज नहीं होते हैं। वहीं, नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) डेटा बताता है कि पंजाब में चार साल में करीब 300 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्या की है। मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किसान हरमुमकिन प्रयास करने में जुटे हुए हैं। वहीं, हर पांचवें दिन करीब 25 किसानों के एक समूह को बस या फिर वैन के जरिए दिल्ली भेजा जा रहा है और फिर यह लोग दिल्ली की सीमाओं पर एक हफ्ता काटने के बाद लौट जाते हैं।