सरकारी वकील बनवाने के नाम पर वकीलों' ने ठग लिए 10 लाख रुपये


  • तीन वकीलों ने ही एक एडवोकेट को सरकारी वकील बनवाने के नाम पर ठग लिया
  • सरकारी लिस्ट में नाम नहीं आया तब पीड़ित मांगने लगा पैसे तो फोन उठाना बंद
  • लक्ष्मी नगर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है
दिल्ली ब्यूरो। तीन वकीलों ने एक एडवोकेट से असिस्टेंट पब्लिक प्रोसिक्यूटर बनवाने का झांसा देकर 10 लाख रुपये ऐंठ लिए। सरकार की तरफ से जारी अपॉइंटमेंट की लिस्ट में जब पीड़ित वकील का नाम नहीं आया तो उन्हें अपने साथ ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित ने अपने पैसे मांगे तो पहले आरोपियों ने फोन उठाने बंद कर दिए। पहले उन्होंने कहा था कि टेंशन मत लो, नियुक्ति पक्का समझो। लगातार पीछे पड़ने पर उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट परिसर में बुलाकर एक पोस्ट डेटेड चेक दे दिया गया। बताई गई डेडलाइन पर जब चेक बैंक में डालने पर बाउंस हो गया। लिहाजा उन्होंने कड़कड़डूमा बार असोसिएशन और लक्ष्मी नगर थाने में लिखित कंप्लेंट दी। लक्ष्मी नगर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पीड़ित 29 साल के वकील परिवार के साथ लक्ष्मी नगर के ज्ञान कुंज में रहते हैं। वह दिल्ली बार काउंसिल में एनरॉल्ड एडवोकेट हैं। उनका दावा है कि वह अगस्त 2019 में ग्रीन पार्क में रहने वाले तीन वकीलों से अपने एक जानकार वकील के जरिए मिले थे। आरोपी वकीलों ने बताया कि दिल्ली सरकार ने 2017 में असिस्टेंट पब्लिक प्रोसिक्यूटर का नोटिफिकेशन निकाला था, लेकिन अब तक अपॉइंटमेंट नहीं हुई हैं। इनका ऐलान सितंबर या अक्टूबर 2019 में होने का दावा किया। आरोपी वकीलों ने दावा किया कि उनकी सरकारी विभागों में काफी गहरी पैठ है। इसलिए वो पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त करवा सकते हैं। इसके लिए 20 लाख रुपये मांगे गए, जिसमें से 10 लाख रुपये एडवांस और 10 लाख काम पूरा होने के बाद देने की बात कही गई। इसके बाद से तीनों लगातार उन्हें सब्जबाग दिखाते रहे। आखिरकार वह उनके जाल में फंस गए। पैरंट्स और फैमिली फ्रेंड्स की मदद से 10 लाख रुपये जुटा लिए। दो आरोपी उनके घर से यह रकम ले गए। रिज्यूमे और दो पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ भी लिए। लंबे समय तक जब इंटरव्यू का कोई कॉल नहीं आया तो उन्होंने आरोपियों से बात की। उन्होंने दावा किया फरवरी 2020 में घर पर ही कॉल लेटर आ जाएगा। लेकिन फरवरी मे पीड़ित वकील लिस्ट देखकर हैरान रह गया, क्योंकि उसका नाम नहीं था। आरोपी पहले तो मामले को टालते रहे और बाद में फोन पिक करने भी बंद कर दिए। जब पीड़ित ज्यादा पीछे पड़े तो मार्च में दिल्ली हाई कोर्ट बुलाकर जून 2020 के लिए 10 लाख का पोस्ट डेटेड चेक पकड़ा दिया। आरोपियों ने कहा कि अगर जून तक अपॉइंटमेंट लेटर नहीं आया तो खाते में चेक डाल देना। लेटर तो आया नहीं, चेक खाते में डाला तो बाउंस हो गया।