गाजियाबाद में रंगे हाथ पकड़ा 12वीं पास फर्जी फूड इंस्पेक्टर


सूर्य प्रकाश,(गाजियाबाद)। लाजपतनगर में सोमवार को फर्जी फूड इंस्पेक्टर बनकर लाइसेंस बनाने का झांसा देकर दुकानदारों से रकम हड़पने वाले को फूड सेफ्टी विभाग ने एक दुकानदार की मदद से पकड़ लिया। फूड सेफ्टी विभाग ने फर्जी फूड इंस्पेक्टर को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने आरोपी के पास से गुरुग्राम समेत अन्य कई स्थानों के दुकानदारों के बने फर्जी लाइसेंस भी बरामद किए हैं। वहीं, ओम बेकरी एंड डेयरी संचालक की ओर से मिली शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। लाजपतनगर में ओम बेकरी एंड डेयरी के नाम से राहुल शर्मा की दुकान है। उन्होंने बताया कि सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे वह अपनी डेयरी पर थे तभी एक युवक दुकान पर आया और खुद को फूड इंस्पेक्टर बताने लगा। युवक ने उनसे लाइसेंस बनाने के नाम पर दो हजार रुपये मांगे। इसके बाद युवक ने उन्हें लाइसेंस बनाकर दे दिया। युवक का कहना था कि लाइसेंस फूड सेफ्टी विभाग की ओर से जारी है। राहुल ने लाइसेंस संदिग्ध लगने पर फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। आननफानन चीफ अधिकारी एनएन झा कई इंस्पेक्टरों के साथ पहुंच गए। अधिकारियों ने लाइसेंस की जांच की तो वह फर्जी निकला। आरोपी को मौके पर ही दबोच कर साहिबाबाद पुलिस को सूचना दी। एसएचओ विष्णु कौशिक ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी आरिफ निवासी शास्त्री पार्क दिल्ली हैं। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह यमुना विहार दिल्ली स्थित डिवाइस सोल्यूशन नामक कंपनी के ऑफिस में काम करता है। कंपनी का मालिक प्रह्लाद कुमार है। आरोपी ने पुलिस को बताया कि प्रह्लाद ही ऑनलाइन लाइसेंस बनाने का काम करता है। दुकानदार राहुल शर्मा की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
12वीं पास आरोपी दो माह से दिल्ली से आकर करता था ठगी
आरोपी 12वीं पास है। वह बीते दो माह से दुकानदारों से फर्जी लाइसेंस के नाम पर ठगी कर रहा था। उनसे बताया कि वह इस तरह से फॉर्मल कपड़े और जूते पहनता है और ऐसे बात करता है। जिससे किसी भी दुकानदार को उस पर कोई शक न हो। इसी का फायदा उठाकर यह धंधा कर रहा है। पुलिस उसके साथी प्रह्लाद कुमार के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
एडिट कर बनाता था लाइसेंस
चीफ फूड सेफ्टी अधिकारी एनएन झा ने बताया कि ऑनलाइन लाइसेंस की प्रक्रिया में 100 रुपये फीस है। आरोपी इतना शातिर था कि वह एक ऑरिजनल लाइसेंस निकालकर एडिट करके उसके नंबर ऊपर नीचे करके फर्जी लाइसेंस बनाता था। इसके लिए दुकानदारों से दो हजार रुपये से पांच हजार रुपये तक वसूलता था। उन्होंने बताया कि आरोपी दुकानों के बाहर लिखे नंबरों को ले जाता था। इसके बाद उन्हें कॉल कर फूड लाइसेंस होने के लिए पूछता था, जिसका नहीं बना होता था। वहां पहुंच जाता था।