मुरादनगर श्मशान घाट हादसाः 17 दिन में ही अफसर भूले वादे, मृतक के परिवार का राशन भी बंद किया, पेट भरने के लाले


गाजियाबाद ब्यूरो। मुरादनगर श्मशान घाट हादसे को 17 दिन बीत चुके हैं। पीड़ितों के जख्म पर मरहम लगाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने कई वादे किए थे। लेकिन, चंद दिनों में ही अफसर वादों को भूल गए। गाजियाबाद के संगम विहार कॉलोनी निवासी नीरज की भी इसी हादसे में मौत हुई थी। उनकी पत्नी कविता ने कहा कि अब तक मात्र 10 लाख रुपये की मदद मिली है। सरकारी नौकरी और मकान का वादा किया गया था। लेकिन, इस पर कोई कुछ बोल न रहा है। कविता ने कहा कि हादसे के चंद रोज ही बीते हैं, लेकिन अफसरों ने राशन देना बंद कर दिया। घर में कमाई का आखिरी जरिया पति (नीरज) ही थे। 4 बच्चों की जिम्मेदारी है। सबसे बड़ा बेटा 16 साल का है। सबसे छोटा बेटा 10 साल का है। 2 बेटिया हैं।
घर चलाना मुश्किल
कविता ने बताया कि अभी से घर का खर्च चलाने में मुश्किल हो रही है। ऐसे में बच्चों की 12वीं के बाद पढ़ाई और शादी के खर्च को कैसे पूरा कर पाऊंगी। कविता ने बताया कि नीरज ने घर बनाने के लिए बैंक से लोन लिया था। 10 लाख रुपये में से अगर लोन चुका दिया तो खाने के लिए भी दिक्कत हो जाएगी।
2-4 महीनों में छूट जाएंगे जिम्मेदार
कविता ने कहा कि हमेशा गरीबों को ही भ्रष्टाचार की कीमत चुकानी पड़ती है। मामला अभी ताजा है तो सभी सख्ती दिखा रहे हैं। 2-4 महीने बाद सारे जिम्मेदार जेल से छूट जाएंगे। फिर किसी को भी यह हादसा याद न रहेगा। 24 लोगों की मौत के दर्द की भरपाई क्या 10 लाख रुपये के मुआवजे से की जा सकती है।
'नौकरी न मिली तो बिखर जाएगा परिवार'
कविता ने कहा कि परिवार को पालने के लिए सरकारी नौकरी की जरूरत है। सरकार ने वादा किया था। अब कोई अफसर इस पर बात करने के लिए भी तैयार नहीं है। 4 बच्चे हैं। इनमें 2 बेटियां हैं। इनकी पढ़ाई-शादी का जिम्मा मेरे ऊपर है। नौकरी नहीं मिली तो पूरा परिवार बिखर जाएगा।