यूपी में आबकारी विभाग तस्करों पर क्यों नहीं करता धारा 272 की कार्रवाई


बुलंदशहर। आबकारी अधिनियम की धारा 60 (जमानती अपराध की श्रेणी) शराब तस्करों के लिए किसी अभयदान से कम नहीं है। इस धारा में मामला दर्ज होने पर आरोपियों को थाने से ही जमानत मिल जाती है। जबकि, ऐसे मामलों में आईपीसी की धारा 272 (कम से कम छह महीने की जेल या आजीवन कारावास) का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें सजा के कड़े प्रावधान हैं। बावजूद, यह नहीं लगाई जाती है, जिससे तस्करी का कारोबार फलफूल रहा है। यूपी में आबकारी विभाग की ओर से पिछले वर्ष में अब तक जिले में अवैध शराब के कारोबार में लिप्त तीन दर्जन लोगों पर कार्रवाई की गई है। बावजूद, शराब का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। गांव देहात में जगह-जगह खुलेआम कच्ची शराब बिक रही है। इतना ही नहीं इसे बनाने के लिए भट्टियां भी खूब चोरी-छिपे पुलिस व आबकारी विभाग की लापरवाही के कारण धधक रही हैं। लाइसेंसी मदिरा भी व्यापक पैमाने पर मिलावट की चपेट में है।
दो करोड़ की पकड़ी गई थी शराब
पिछले साल बुलंदशहर में दो करोड़ से अधिक रुपये की मिलावटी शराब पकड़ी गई थी। जानकारों की माना जाए तो इसकी मुख्य वजह आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली बनी हुई है। इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ बाकी सभी में अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मुकदमा दर्ज करती है। ज्यादातर आरोपियों को तो थाने से ही मुचलके पर छोड़ दिया जाता है।
अजमानतीय अपराध की श्रेणी में
बाहर निकलकर एक बार फिर वह अपने काम को अंजाम देने में जुट जाते हैं। जबकि, शराब में खतरनाक अपमिश्रण मिलने पर आईपीसी की धारा 272 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। इस धारा के तहत मिलावट को संज्ञेय व अजमानतीय अपराधों में रखा गया है। इसका विचारण सत्र न्यायालय में ही किया जा सकता है। लेकिन, यह धारा शराब के अवैध कारोबारियों पर नहीं लगाई जाती। आबकारी विभाग इससे बचता है, जिससे अवैध शराब के कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
लाइसेंसी दुकानों पर खूब बिक रही मिलावटी शराब
लाइसेंसी दुकानों पर मिलावटी शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है, परंतु दुकानों की जांच की जहमत नहीं उठाई जाती। नो जनवरी को सिकंदराबाद एरिया के जीत गढ़ी व नया गांव में नकली देसी शराब का जखीरा गेहूं के खेत से पकड़ा गया है। 8 जनवरी को जहरीली शराब का सेवन करने पर छह लोगों की मौत हो चुकी है । लेकिन उसके बाद एक भी दुकान पर छापामारी नहीं की गई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
नकली के साथ ओवर रेटिंग की भी मार
शराब के शौकीनों पर मिलावट के साथ-साथ ओवर रेटिंग की भी दोहरी मार पड़ रही है। खासतौर पर ज्यादा बिकने वाले ब्रांड रॉयल चैलेंज, ब्लेंडर प्राइड, रॉयल स्टेग की बोतल पर बीस रुपये तक अधिक वसूल किए जा रहे हैं। इसी तरह क्वार्टर पर भी दस रुपये तक अधिक वसूले जा रहे हैं। वहीं, बीयर की प्रति बोतल/केन पर बीस रुपये तक की ओवर रेटिंग हो रही है।
सबको खबर है, पर इच्छाशक्ति का है अभाव
चाहे असली दुकानों पर नकली, मिलावटी और दूसरे प्रांतों की शराब बिकने का मामला हो, ऐसा नहीं नीचे से लेकर ऊपर तक के पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों तक को पता नहीं, या दिखता नहीं। लेकिन बदस्तूर यह गोरखधंधा जारी है। हैरत की बात तो यह है कि पिछले दिनों जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने समीक्षा बैठक में इसके लिए जिम्मेदार विभाग की कार्य प्रणाली और कर्णधारों की इच्छाशक्ति पर सवालिया निशान उठाते हुए यहां तक कह दिया था कि यह शराब का गोरखधंधा तो जरा सी कड़ाई पर रुक सकता है, बशर्ते वह रोकना चाहे, आधे मिनट के सन्नाटे के बाद बैठक में विषय को ही बदल दिया गया। गांव में जहरीली शराब के सेवन से छह लोगों की मौत के बाद हाहाकार मचा हुआ है।
डीएम व एसएसपी को मिले 700 क्वाटर
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार व एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से जीत गढ़ी और नया गांव के खेतों में सिकंदराबाद के एसडीएम और सीओ व अन्य पुलिस बल के साथ भारी मात्रा में शराब पड़ी हुई होने की सूचना पर पहुंचे तो वहां पर करीब 700 क्वाटर बरामद हुए हैं। अधिकारियों ने शराब को अपने कब्जे में ले लिया है बताया जा रहा है कि ब्रांडेड क्वार्टर में जहरीली वह नकली शराब हो सकती है इसकी जांच कराई जा रही है।
शराब ले आओ और 5000 का इनाम पाओ
जिलाधिकारी मृतकों के गांव पहुंचे और उन्होंने लाउडस्पीकर से गांव में अनाउंस किया कि जिसे भी देसी शराब जो खतरनाक है उसे ले आओ और ₹5000 का इनाम ले जाओ। शराब लाने वाले को इनाम मिलेगा और उसका नाम भी गुप्त रखा जाएगा उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। जिलाधिकारी ने बताया कि उनका उद्देश्य है कि गांव में किसी के यहां पर भी यह जहरीली शराब बच ना पाए।