कानपुर में 5.50 लाख के फर्जी स्टांप के साथ दो अरेस्ट, पड़ताल में जुटी पुलिस


कानपुर ब्यूरो। कानपुर पुलिस ने दो स्टांप वेंडर्स को अरेस्ट किया है। इनके पास से साढ़े पांच लाख के फर्जी स्टांप और फर्जी नोटरी टिकट बरामद हुई है। पुलिस की पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा है। दोनों वैंडर्स भागलपुर और वेस्ट बंगाल से फर्जी स्टांप और फर्जी नोटरी टिकट खरीदकर लाते थे। इसके बाद इन्हे कानपुर, प्रयागराज और आसपास के जिलों में बेचते थे। दोनों करोड़ों के राजस्व का चूना लगा चुके हैं। पुलिस के मुताबिक फर्जी स्टांप का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है। कानपुर पुलिस इन कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। पुलिस को बीते कई महीने से फर्जी स्टांप में वसीयतनामा और एग्रीमेंट के कागजातों में फर्जीवाड़े की शिकायतें मिल रही थी। बर्रा पुलिस ने बीते बुधवार देररात फर्जी स्टांप बेचने वाले कर्नलगंज निवासी जीशान और प्रयागराज में रहने वाले रंजीत कुमार रावत को साढ़े पांच लाख के फर्जी स्टांप पेपर और नोटरी टिकट के साथ अरेस्ट किया है। पुलिस की पूछताछ में दोनों स्टांप विक्रताओं ने बताया है कि कोलकाता और भागलपुर से इस्तेमाल किए हुए स्टांप पेपर खरीद कर लाते थे। इसके बाद उन स्टांप पर लिखा हुआ मैटर मिटाने के लिए ब्लीचिंग कर साफ करते थे। पुराने स्टांप बहुत ही ज्यादा कीमत पर बिकते थे। इसके साथ ही नोटरी टिकटों को भी खरीदकर लाते थे, और बड़ी ही आसानी से बेचते थे।
लाइसेंस की आड़ में जाली स्टांप पेपर बेचते थे
डीआईजी प्रीतिंदर सिंह के मुताबिक शीजान और रंजीत कुमार रावत दोनों नोटरी वेंडर्स हैं। इनके पास खरीदने और बेचने का लाइसेंस है। इनके पास से 05.50 लाख के फर्जी नोटरी स्टांप, रीयूज्ड नोटरी पेपर बरामद हुए हैं। पूछताछ में दोनों ने बताया है कि कानपुर और प्रयागराज में नकली स्टांप बेचते थे। भागलपुर और कोलकाता से स्टांप पेपर लाते थे। दोनों अभियुक्तों की तरह ही देश में विभिन्न स्थानों में स्टांप और नोटरी स्टांप लोग अपने लाइसेंस की आड़ में बेच रहे है।
15 साल से बेच रहे फर्जी स्टांप
डीआईजी के मुताबिक पूछताछ में दोनों बताया है कि कोलकाता में कुछ मशीनें लगी हुई हैं। कुछ जगहों के नाम भी बताए हैं। इस आधार पर हम वहां की पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराएंगे। हमें इनके पास से जो स्टांप मिले हैं, उन स्टांप पेपरों को इन्होने एक बांग्ला न्यूज पेपर से कवर्ड किया था। कुछ इनके साथी हमारे संज्ञान में आए हैं। जो अलग-अलग जिलों में फर्जी स्टांप बेचते हैं, जल्द ही इनके अन्य साथियों को भी अरेस्ट किया जाएगा। दोनो वेंडर्स बीते 15 वर्षों से इस तरह का काम कर रहे हैं।