डीएम अजय शंकर पांडेय ने रैनबसेरों में बिताई रात, वहीं से किया ऑफिस का काम


  • शिकायत करने वाले समाजसेवी को फोन कर बुलाया लेकिन वह नहीं आए मौके पर
  • रैन बसेरे में ठहरे लोगों के साथ कंबल ओढ़कर की बातचीत, जैकेट भी बांटे
  • डीएम डॉ. अजय शंकर पांडेय ने रैन बसेरों की व्यवस्थाओं पर जताया संतोष
सूर्य प्रकाश,(गाजियाबाद)। रैन बसेरे की व्यवस्थाओं को देखने के लिए डीएम डॉ. अजय शंकर पांडेय मंगलवार को रात में निकल पड़े। उन्हें दिन में शिकायत मिली थी कि रैनबसेरे के कंबलों में से बदबू आ रही है। चादर फटी हुई है। गंदगी का भी अंबार है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने न केवल रैन बसेरे की साफ-सफाई देखी बल्कि वहां के बिस्तर पर बैठकर अपने ऑफिस का कुछ काम भी निपटाया। औचक निरीक्षण में जिलाधिकारी को रैन बसेरों में सुविधाएं ठीक मिली हैं। दरअसल, मंगलवार सुबह 11 बजे एक समाजसेवी ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी से मुलाकात की और उनसे शहर में बने रैन बसेरों में खराब इंतजाम की शिकायत की। बताया कि रैन बसेरों में 10 मिनट भी रुका नहीं जा सकता है। चाहें तो खुद जिलाधिकारी ही जाकर मौके पर स्थिति देख लें। जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि वह खुद जाकर रैन बसेरों का हाल देखेंगे। इसके बाद उसी रात निरीक्षण पर निकल गए। रात में 11 बजे डीएम अपने कर्मचारियों के साथ रैन बसेरों का आकस्मिक निरीक्षण करने के लिए निकले। सबसे पहले वह अर्थला रैन बसेरा में गए और वहां कंबल व बिस्तर को देखा। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से बातचीत भी की। इसके बाद वह देररात 12:30 बजे राजनगर स्थित डूडा के रैन बसेरा पहुंचे। वहां कुछ लोग सो रहे थे और कुछ लोग आपस में बातचीत कर रहे थे। डीएम को देखकर वे खड़े हो गए लेकिन डीएम ने उन्हें ठंड में बिस्तर में रहने के लिए कहा। डीएम के कहने पर उनके ओएसडी ने रैन बसेरे की शिकायत करने वाले समाजसेवी को फोन कर डीएम के आने की जानकारी दी और उन्हें भी वहां आमंत्रित किया। समाजसेवी ने 15 मिनट में आने की बात बोलकर अपना फोन बंद कर लिया। करीब एक घंटा तक डीएम वहां पर रहे। इस बीच रैन बसेरा के मैनेजर नई चद्दर और कंबल लेकर आया लेकिन डीएम ने मना कर दिया। डीएम ने वहां पर ठहरे लोगों को जैकेट भी गिफ्ट की।