चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर एफआरएस से दिल्ली पुलिस ने पकड़ा कुख्यात अपराधी


  • दिल्ली पुलिस एफआरएस के जरिए अपराधियों की आसानी से पहचान कर पा रही है
  • चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर की मदद से अब सड़कों पर आते-जाते अपराधी पहचान में आ रहे हैं
  • एक जनवरी की शाम जामियानगर में भी एक बाइक सवार की पहचान कुख्यात अपराधी के रूप में हुई
नई दिल्ली ब्यूरो। दक्षिण पूर्व दिल्ली के जामियानगर में पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक बाइक को रोका तो उसका ड्राइवर जरूरी कागजात नहीं दिखा पाया। पुलिस ने सिर्फ चालान काटने की जगह चेहरा पहचानने वाले सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का फैसला किया और इस सॉफ्टवेयर ने बाइक चालक की पहचान इलाके के एक कुख्यात अपराधी  के रूप में की। बाटला हाउस का रहने वाला 27 वर्षीय सुहैल अंसारी दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिल्ली में छिनतई की कई वारदातों को अंजाम दे चुका है।
एफआरएस ने सामने रख दी सुहैल की आपराधिक कुंडली
डीसीपी आरपी मीना ने कहा, "1 जनवरी को शाम करीब 7.30 बजे सेलिंग क्लब रोड पर बाइकर को रोका। उसे 18 मामलों में संलिप्त पाया गया। हमारी टीमों को एफआरएस और चोरी के वाहनों की तलाशी के सिस्टम वाले ऐप्लिकेशनों के इस्तेमाल का निर्देश दिया गया है।" सुहैल जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा सका तो पुलिस ने ई-बीट बुक में इंस्टॉल किए गए एफआरएस के उपयोग से उसकी पहचान की। सॉफ्टवेयर ने सुहैल के खिलाफ डकैती, छिनतई, चोरी और आर्म्स ऐक्ट के तहत दर्ज मामलों का खुलासा कर दिया। जब वाहनों का मिलान करने वाले सॉफ्टवेयर से रजिस्ट्रेशन नंबर को स्कैन किया गया तो पता चला कि बाइक चोरी की है। सुहैल ने पूछताछ में बताया कि उसने अपने सहयोगी के साथ मिलकर मोटर साइकिल चुराई थी जिसकी तलाश की जा रही थी।
क्रिमिनल रेकॉर्ड मिलते ही अलर्ट देता है सॉफ्टवेयर
दिल्ली पुलिस ने स्मार्ट सिटी पहल के तहत कुछ साल पहले ही एफआरएस खरीदे थे। यह सॉफ्टवेयर कंट्रोल रूम के जरिए सीसीटीवी कैमरों से फीड ले लेता है जिसके बाद वीडियोज को पुलिस रेकॉर्ड्स से मैच किया जाता है। एक पुलिस ऑफिसर ने कहा, "किसी क्रिमिनल रेकॉर्ड से चेहरा मिल जाने पर सॉफ्टवेयर अलर्ट साउंड देता है। इसमें लगा इमेज एनहांसिंग फीचर धुंधली तस्वीरों से भी चेहरे की पहचान कर लेता है।" आपराधिक मामलों की जांच में इस सिस्टम का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।
गुमशुदा बच्चों की तलाश में भी कारगर साबित हो रहा है एफआरएस
कुछ दिन पहले ही इस सॉफ्टवेयर के जरिए विभिन्न आश्रय स्थलों में रह रहे 45 हजार बच्चों के चेहरों का मिलान किया गया था। इनमें 2,930 बच्चे की पहचान सिर्फ चार दिनों के अंदर हो गई थी। अधिकारी ने कहा, "एफआरएस चेहरे के विभिन्न पहलुओं को स्टोर कर लेता है और उन्हें तस्वीरों और ट्रैक चाइल्ड पोर्टल में अपलोड डेटाबेस से मिलाता है। इस तरह से बच्चों की पहचान तुरंत उजागर हो जाती है।" राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इस तरह के सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की वकालत की थी ताकि गुमशुदा बच्चों की पहचान कर उन्हें उनके परिजनों को सौंपा जा सके।