बनने के बाद से बिना 'फायर एनओसी' के ही चल रहा था भंडारा का जिला अस्पताल


  • बिना फायर एनओसी के ही चल रहा था भंडारा का सरकारी अस्पताल
  • बनने के बाद से ही बिना एनओसी के चल रहा था यह सरकारी अस्पताल
  • भंडारा स्वास्थ्य विभाग ने पत्र लिख फायर ऑडिट करने का आग्रह किया था
  • भंडारा के सरकारी अस्पताल में दस नवजात शिशुओं की आग में जलने से हुई थी मौत
कांती जाधव,(मुंबई ब्यूरो)। महाराष्ट्र के भंडारा जिले के सरकारी अस्पताल में शनिवार को लगी भीषण आग में 10 नवजात शिशुओं की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र को सदमे में पहुंचा दिया था। हालांकि उससे भी ज्यादा स्तब्ध करने वाली खबर यह है कि अस्पताल जब से बना है, तब से अस्पताल ने भंडारा नगर परिषद की तरफ से एनओसी नहीं ली थी। रिपोर्ट के मुताबिक भंडारा जिले का सरकारी अस्पताल साल 1981 में बना था। हैरत वाली बात यह है कि तब से लेकर दुर्घटना के दिन तक अस्पताल प्रशासन ने जरूरी फायर विभाग की एनओसी नहीं ली थी। साल 2015 में अस्पताल का विस्तार भी किया गया था। जिसमें सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट, मेडिकल स्टोर और न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर बनाया गया था। लेकिन यहां भी जरूरी फायर एनओसी नहीं ली गई थी। अस्पताल का निर्माण पूरा होने के बाद पीडब्ल्यूडी ने इसे बिना ओसी के ही सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया था। वर्ष 2015 के बाद कायाकल्प योजना के अंतर्गत साल 2016-17 सिर्फ एक फायर ड्रिल करवाई गई थी। इस भीषण आग की जांच के लिए 6 सदस्यों की टीम का गठन किया गया है। जो मामले की जांच कर रही है। आग की वजह से एसएनसीयू की ऑक्सीजन पाइप और इलेक्ट्रिक वायरिंग सिस्टम पिघल गया था। एसी में भी गड़बड़ी की बात सामने आई है। जांच अधिकारियों को शक है कि आग आउट बॉर्न सेक्शन के रेडियंट वार्मर या फिर इलेक्ट्रिक वायरिंग से लगी हो सकती है। क्योंकि दोनों ही बुरी तरह जले हुए हैं।