गाड़ी पर जाति लिखवाकर 'भौकाल' गांठना पड़ेगा 'मंहगा'


  • वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखकर चलना एक ट्रेंड बना
  • जातिसूचक शब्द या नंबर प्लेट से छेड़छाड़ के मामले में एमवी एक्ट की धारा 177
  • शान दिखाने और भौकाल बनाने के लिए वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखवाते हैं
गाजियाबाद ब्यूरो। वाहनों की नंबर प्लेट पर जाति और सरनेम लिखवाकर लोग शान दिखाने में मस्त हैं। वे इसे अपना शौक समझकर भौकाल बना रहे हैं। मजबूरन ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ रही है। उनका चालान भी काटा जा रहा है। हालांकि, इसके नियम को लेकर कुछ लोगों में भ्रांतियां हैं।
अलग दिखने के लिए लिखते हैं जाति
वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखकर चलना एक ट्रेंड हो गया है। अक्सर कार और बाइक पर इस प्रकार के शब्द लिखे दिख जाते हैं। हालांकि, जिले में पुलिस ने समय-समय पर अभियान चलाकर ऐसे 300 से ज्यादा लोगों के चालान किए हैं। वहीं, नंबर प्लेट पर होने वाला एक्शन न के बराबर है। अधिकारी बताते हैं कि किसी भी प्रकार के जातिसूचक शब्द या नंबर प्लेट से छेड़छाड़ के मामले में एमवी एक्ट की धारा 177 के तहत कार्रवाई जाती है। इसमें अधिकतम चालान 500 रुपये का है। पुलिस के अनुसार, इस धारा में गाड़ी को सीज नहीं किया जा सकता है। अभी तक इस धारा के तहत वाहन का चालान किया जा सकता है। इसके अलावा लाइसेंस, परमिट और रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर वाहन को सीज किया जा सकता है। वहीं, मनोचिकित्सक डॉक्टर संजीव त्यागी ने बताया कि कुछ लोगों में अपने आप को समाज में अलग दिखाने की सोच होती है। वह स्टीकर या किसी चिह्न के माध्यम से पहचान बताने की कोशिश करते हैं।
पढ़े-लिखे लोग ही कर रहे उल्लंघन
नंबर प्लेट पर कुछ भी लिखवाना नियमों का उल्लंघन है। चंडीगढ़ में तो नंबर प्लेट के अलावा वाहन के शीशे पर भी कुछ लिखवाने पर चालान है। चंडीगढ़ पुलिस वहां सख्ती से कार्रवाई कर रही है। गुड़गांव में भी ट्रैफिक पुलिस हर दिन ऐसे 40 से अधिक वाहनों का चालान कर रही है, लेकिन फिर भी लोग मानने को तैयार नहीं हैं। युवा तो नंबर प्लेट व वाहन पर जाति लिखवाते हैं, जबकि उम्रदराज व समझदार लोग इनका उल्लंघन करते हैं। वे अपने वाहन व नंबर प्लेट पर पेशा, राजनीतिक या संस्था का पद भी लिखवाते हैं। जैसे कोई पुलिसकर्मी तो कोई सैनिक लिखवाता है। कोई अपनी राजनीतिक पार्टी का नाम के साथ अपना पद भी लिखवा रहा है।
शान दिखाने में भूल जाते हैं नियम
जिले में शान दिखाने और भौकाल बनाने के लिए वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखवाते हैं। यादव, गुर्जर, त्यागी, जाट, राजपूत और पटेल जैसे शब्दों के अलावा वाहनों पर कोट भी लिखवाए जाते हैं। जब से पुलिस ने कार्रवाई करनी शुरू की है, तब से ऐसे वाहन सड़कों पर कम नजर आने लगे हैं। पुलिस की कार्रवाई का असर ऐसे वाहन चालकों पर देखने को मिला है। जिले में रजिस्ट्रेशन का गलत इस्तेमाल भी होता है। वाहनों पर प्लेट तो लगी होती है, लेकिन नंबर गायब होते हैं। कई बार फैंसी नंबर प्लेट के चक्कर में कुछ और ही लिखवा दिया जाता है।
झूठी शान और युवा नेता नगरी में गाड़ियों की नंबर प्लेट पर लिखाई जाती है जाति
हरियाणा में जातियों का प्रदर्शन करने में लोग अपनी शान समझते हैं। ऐसा ही कुछ मंजर फरीदाबाद में भी देखने को मिलता है। यहां लोग गाड़ियों पर जातियों का नाम नंबर प्लेट और शीशों पर लिखने में अपनी शान समझते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस सख्ती भी दिखाती है, लेकिन फिर भी लोग चालान करवाने के बाद भी जागरूक नहीं हैं। रोजाना शहर में पुलिस 20 से अधिक गाड़ियों के चालान काटती है। कुछ लोग 'जाति का गौरव' की भावना जगा कर अपना हित साधते हैं। अक्सर देखने को मिलता है कि लोग अपनी गाड़ियों के नंबर प्लेट और शीशे पर जाट, गुर्जर, यादव जैसे जातिसूचक शब्द लिख देते हैं। पुलिस ने अब गाड़ियों के नंबर प्लेट या शीशे पर जातिसूचक शब्द लिखने पर कार्रवाई शुरू की है।
वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। रजिस्ट्रेशन प्लेट में खामियां मिलने या फिर फैंसी नंबर प्लेट लगे वाहनों के भी चालान किए जा रहे हैं। -गणेश प्रसाद साहा, डीसीपी ट्रैफिक नोएडा
जातिसूचक शब्दों को लिखने वालों पर एक्शन लिया जा रहा है। पहले भी इसके लिए अभियान चलाया गया था। अब आगे भी अभियान चलाए जाएंगे। लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। -रामानंद कुशवाहा, एसपी ट्रैफिक गाजियाबाद
हम जातिसूचक शब्दों को गाड़ियों से हटा भी रहे हैं और चालान कर रहे हैं। पहली बार में सिर्फ चालान और गाड़ियों से जातिसूचक शब्द हटवा रहे हैं। अगर दोबारा उसी गाड़ी में जातिसूचक शब्द लिखा मिलेगा तो गाड़ियों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। -जयपाल सिंह, एसीपी ट्रैफिक फरीदाबाद
हमारी टीम नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्हें हिदायत भी दी जा रही है कि वे नियमों का उल्लंघन न करें। -संजीव बलहारा, एसीपी ट्रैफिक गुड़गांव
क्या है नियम
सफेद रंग की नंबर प्लेट पर काले रंग से नंबर प्रिंट होना चाहिए। ये नंबर प्लेट से थोड़े उभरे हुए होने चाहिए। नंबर प्लेट हाई सिक्यॉरिटी वाली होनी चाहिए। अन्यथा 500 रुपये का चालान कट सकता है। नंबर प्लेट पर सरनेम, विभाग का नाम या अन्य कुछ भी लिखवाना मना है।
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
मनोचिकित्सक राहुल बंसल ने बताया कि वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखना अलग-अलग तरह की मानसिकता है। कुछ लोग अपनी जाति का प्रचार करने या फिर उस जाति के ठाठ दिखाने के लिए ऐसा करते हैं। कुछ लोग अपनी शान और भौकाल बनाने के लिए भी ऐसा करते हैं, बाकी इसके पीछे कोई खास वजह नहीं है। बीके अस्पताल के मनोवैज्ञानिक डॉ. धर्मवीर नेहरा ने बताया कि यह सिर्फ और सिर्फ झूठी शान के लिए लोग करते हैं। कुछ जातियों के युवा वर्ग में नेता बनने की चाहत में यह गुण विशेष तौर पर देखा जाता है। कुछ लोग 'जाति का गौरव' की भावना जगा कर अपना हित साधते हैं। ये लोग झूठी शान के कसीदे खूब गढ़ेंगे।