ट्रैक्टर परेड का 'सांप' अपने गले में नहीं डलने देगी दिल्ली पुलिस, सीमा के भीतर नहीं घुस सकेंगे किसान!


दिल्ली ब्यूरो। गणतंत्र दिवस पर किसान संगठनों द्वारा प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड को लेकर कई तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। एक तरफ किसान संगठन ट्रैक्टर परेड की तैयारियों में जुटे हैं, तो वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस भी इस लेकर एक अचूक रणनीति बना रही है। केंद्र सरकार में सुरक्षा मामलों को देख रहे एक शीर्ष अधिकारी की मानें तो दिल्ली पुलिस किसानों की ट्रैक्टर परेड का सांप अपने गले में नहीं डलने देगी। ऐसी संभावना बहुत ज़्यादा है कि किसानों को दिल्ली की सीमा के भीतर घुसने ही न दिया जाए। दिल्ली के चारों तरफ जो ट्रैक्टर हैं या आने वाले दिनों में जिनके इस आंदोलन में शामिल होने के आसार हैं, वे दिल्ली के बाहर ही रहेंगे। एक सवाल पर शीर्ष अधिकारी का कहना था कि भले ही किसान संगठनों ने यह भरोसा दिलाया है कि वे शांतिपूर्वक तरीके से बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। वे राजपथ से बहुत दूर रहेंगे। किसान संगठनों का कहना है कि एक लाख से ज्यादा ट्रैक्टर, परेड में शामिल होंगे। करीब एक लाख बाइक भी आ सकती हैं। एक ट्रैक्टर पर कम से कम पांच लोग बैठेंगे। मतलब, पांच छह लाख लोग दिल्ली के भीतर आ सकते हैं।इस आंदोलन को लेकर खुफिया एजेंसियों के पास जो इनपुट हैं, उसके मुताबिक ट्रैक्टर परेड को दिल्ली के भीतर नहीं आने दिया जाएगा। अधिकारी ने बताया, ट्रैक्टर परेड को लेकर हर तरह की जानकारी जुटाई गई है। मौजूदा समय में जो किसान संगठन आंदोलन कर रहे हैं, सरकार उन पर भरोसा करने को तैयार है, मगर इस बात की क्या गारंटी है कि उनकी ट्रैक्टर परेड में असामाजिक तत्व नहीं घुसेंगे। जैसे जैसे 26 जनवरी निकट आ रही है, वैसे ही अमेरिका, ब्रिटेन और कनाड़ा से खालिस्तानी संगठन के फोन आने की रफ्तार बढ़ने लगी है।
इन देशों से भारत विरोधी संगठनों के लगातार फोन आ रहे हैं। मीडिया के पास अब तो एक दिन में कई बार फोन आने लगे हैं। सिख फॉर जस्टिस के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू के नाम से आने वाली फोन कॉल में सीधे तौर से गणतंत्र दिवस पर कोई धमाका करने जैसी धमकी दी जा रही है। पन्नू की तरफ से यह भी कहा जा रहा है कि इस तरह की घटना के लिए भारत सरकार जिम्मेदार होगी।बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संगठन का नाम आतंकियों की सूची में डाल रखा है। इस संगठन पर आरोप हैं कि इसके द्वारा भारत में खालिस्तान की मांग उठाने वाले संगठनों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। ऐसी खबरें आ रही हैं कि इन संगठनों से कुछ ऐसे एनजीओ को आर्थिक मदद भी मिली है जो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर किसान आंदोलन से जुड़े हुए हैं। इसके चलते एनआईए ने जांच शुरू की है। इसके तहत किसान संगठनों के कई नेताओं को पूछताछ में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा गया है। हालांकि जब किसान संगठनों ने इस जांच का विरोध किया तो एजेंसी की तरफ से कहा गया कि इन नेताओं पर सीधे आरोप नहीं हैं। इनसे केवल पूछताछ होगी।
शीर्ष अधिकारी के अनुसार, जब इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं तो किसान संगठनों की शांतिपूर्वक ट्रैक्टर परेड पर भरोसा नहीं किया जा सकता। दिल्ली पुलिस, सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने देगी। इसे लेकर मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव के बीच बातचीत हुई है। श्रीवास्तव ने गृह मंत्री को पूर्ण रूप से आश्वस्त किया है कि वे दिल्ली की कानून व्यवस्था को बिगड़ने नहीं देंगे।वहीं दिल्ली पुलिस के सूत्र बताते हैं कि किसान संगठन एक बार दिल्ली के भीतर आ गए तो कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ने में देर नहीं लगेगी। दिल्ली पुलिस ने भी आंदोलन के बीच से कई तरह की जानकारी जुटाई है। उसमें यह इनपुट भी है कि किसान संगठन अपनी बात पर कायम नहीं रहेंगे।अभी तक किसान संगठनों ने कहा है कि वे बाहरी रिंग रोड पर शांतिपूर्वक तरीके से ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। इस बात की गारंटी कौन लेगा कि उन लाखों ट्रैक्टरों में से कोई इधर-उधर नहीं जाएगा। कोई बाइक तो है नहीं कि जिसे बेरिकेड लगाकर रोक देंगे। ट्रैक्टर हैवी ड्यूटी वाहन है, इसके लिए भारी क्रेन का इंतजाम करना होगा। इतनी भारी संख्या में पुलिस को क्रेन उपलब्ध कराने के लिए आसपास के राज्यों की मदद लेनी पड़ेगी।वहीं किसान संगठनों के बीच में इस ट्रैक्टर परेड को लेकर आपसी फूट भी उजागर हो चुकी है। पहले राकेश टिकैत ने कहा था कि वे लालकिले से गणतंत्र दिवस तक ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। बाद में उन्हें समझाया गया कि यह परेड राजपथ से दूर रहेगी। ऐसे में दिल्ली पुलिस किसी पर भरोसा नहीं कर सकती। कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए ट्रैक्टर परेड को दिल्ली के भीतर नहीं आने दिया जाएगा।बुधवार को आठ किसान यूनियनों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि किसान गणतंत्र दिवस पर सिर्फ दिल्ली के बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर मार्च निकालना चाहते हैं। यह मार्च शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा। सर्वोच्च अदालत ने किसानों की ट्रैक्टर रैली को लेकर कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह सब दिल्ली पुलिस को तय करने दें।