लाल किले पर ग्रिल के नीचे दबी रेखा व रितु पर डंडे बरसा रहे थे उपद्रवी


नई दिल्ली। हरियाणा के जींद जिले की रहने वाले ऋतु ने बताया कि‘हमारी ड्यूटी लाल किले पर थी। हमारे सामने ही ट्रैक्टर और घोड़े पर सवार बड़ी संख्या में उपद्रवी लाल किले में घुस आए। उनके हाथ में पत्थर और तलवारें थीं। भारी भीड़ को आते देख हम लोग जब तक खुद को संभाल पाते उपद्रवियों ने हमला कर दिया। जान बचाने के लिए हम भागे, लेकिन पैर फिसलने के कारण गिरे और लाल किले के किनारे रखा ग्रिल हमारे ऊपर गिर गया। हम ग्रिल के नीचे से निकलने की कोशिश कर रहे थे और चिल्ला रहे थे कि हमें बचा लो, लेकिन मदद करने के बजाय उपद्रवी हमारे ऊपर डंडे बरसा रहे थे।’ भर्राती आवाज में दहशत के उन लम्हों की दास्तां दिल्ली पुलिस की सिपाही ऋतु ने कुछ यूं बया की। ऋतु ने बताया कि वह और उनकी सहयोगी सिपाही रेखा को एक पल को तो ऐसा लगा कि आज जिंदा नहीं बच पाएंगे। मैं और रेखा करीब 15 मिनट तक ग्रिल के नीचे दबे रहे। कुछ देर में वहां पहुंचे सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें ग्रिल हटाकर वहां से निकाला, लेकिन जैसे ही कुछ आगे पहुंचीं उपद्रवियों के एक गिरोह ने उन्हें फिर घेर लिया। कुछ उपद्रवियों ने तलवार से हमला कर दिया।ऋतु ने बताया कि उन्हें हाथ, पैर और सिर में चोट आई है, जबकि रेखा को पेट में गंभीर चोट आई है। इस कारण वह ज्यादा बोल भी नहीं पा रही हैं। लाल किले पर तैनात सिपाही संदीप भी उपद्रवियों के हमले का शिकार हुए और उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया है।संदीप कहते हैं कि हजारों की संख्या में लाल किले में घुसे उपद्रवियों ने हंगामा शुरू कर दिया था। हम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे थे, लेकिन उपद्रवी सुनने को तैयार नहीं थे। वे सीधे मारपीट और हमला करने की मंशा से आए थे। हमने इस दौरान किला परिसर में मौजूद लोगों को बचाने का काम किया और कई पुलिसकर्मियों को जान बचाने के लिए कूदना पड़ा। हीं मोहन गॉर्डन के एसएचओ बलजीत सिंह की भी कहानी कुछ ऐसी ही है। उन्‍होंने बताया कि नजफगढ़ रोड पर हमने बैरिकेड से रास्ता रोका दिया था। किसान प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर लेकर नजफगढ़ की तरफ से आए। उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिया। इसके बाद अचानक से पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान पूरी भीड़ हिंसक हो गई। दूसरी तरफ सिर्फ हथियार ही हथियार दिखाई दे रहे थे।