आईपीएस हेमंत नागराले बने महाराष्ट्र पुलिस के नए डीजीपी


  • वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हेमंत नागराले बने महाराष्ट्र पुलिस के डीजीपी
  • फिलहाल उन्हें महाराष्ट्र डीजीपी का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है
  • हेमंत नागराले फिलहाल डीजी (लीगल एंड टेक्निकल) के पद पर तैनात हैं
  • अब तक सुबोध कुमार जायसवाल थे महाराष्ट्र के डीजीपी
कान्ती जाधव,(मुंबई)। महाराष्ट्र पुलिस के डीजीपी सुबोध कुमार जायसवाल की केंद्र में प्रतिनियुक्ति के बाद खाली हुई पुलिस महासंचालक की पोस्ट पर अब महाराष्ट्र के ही दूसरे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हेमंत नागराले की तैनाती की जाएगी। महाविकास अघाड़ी सरकार ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है। हेमंत नागराले 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही सुबोध कुमार जायसवाल सीआईएसफ के डीजी बनकर दिल्ली गए हैं। हेमंत नागराले 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। फिलहाल उन्हें महाराष्ट्र डीजीपी का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है वह अगले 19 महीनों तक महाराष्ट्र के डीजीपी रह सकते हैं। नागराले साल 2016 में नवी मुंबई के पुलिस आयुक्त भी रह चुके हैं। जिसके बाद साल 2018 में वे नागपुर ट्रांसफर किए गए थे। फिलहाल नागराले पुलिस महासंचालक (लीगल एंड टेक्निकल) के पद पर कार्यरत हैं।
हेमंत नागराले के प्रशंसनीय कार्य
हेमंत नागराले जब नवी मुंबई के पुलिस आयुक्त थे तब वाशी इलाके के बैंक ऑफ बड़ौदा में हुई चोरी ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया था। इस मामले में हेमंत नागराले की टीम ने सिर्फ 2 दिनों के भीतर इस लूट का भंडाफोड़ किया था। पॉप सिंगर जस्टिन बीबर के प्रोग्राम के दौरान बेहतर कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने उनकी तारीफ भी की थी। अपनी ड्यूटी पर लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर वे सख्त एक्शन लेने के लिए भी मशहूर हैं।
हेमंत नागराले और विवाद
नवी मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहते हुए साल 2018 में हेमंत नागराले का निलंबन भी किया गया था। विधान परिषद की मंजूरी न लेते हुए उन्होंने शेकाप पार्टी के विधायक जयंत पाटिल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। रायगढ़ जिला मध्यवर्ती कोऑपरेटिव बैंक के कर्ज वसूली मामले में भी बैंक के अध्यक्ष और संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश हेमंत नागराले ने दिया था। विधान परिषद के सभापति की मंजूरी लिए बिना किसी भी विधायक पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है। जिसकी वजह से नागराले के साथ पुलिस उपायुक्त तुषार जोशी को भी निलंबित करने का आदेश उस समय के सभापति रामराजे नाईक निंबालकर ने दिया था।