गाजियाबाद में बेटियों के स्कूल को बना दिया प्राइवेट कंपनी का मलबाघर


सूर्य प्रकाश,(गाजियाबाद)। एक तरफ सरकार बेटियों की शिक्षा पर जोर दे रही है, दूसरी तरफ नगर निगम ने बेटियों के लिए स्कूल बनाकर उसे मलबा निस्तारण करने वाली कंपनी सीएंडडी (कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिश) को सौंप दिया। इस कंपनी ने यहां मलबे का निस्तारण करने वाला प्लांट लगा दिया जबकि बेटियों को पढ़ने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे स्कूल में जाना पड़ रहा है। निगम ने इसके बदले स्कूल की नई इमारत बनाने का वादा किया था लेकिन वह आज तक पूरा नहीं हो सका। नगर निगम ने वर्ष 2015 में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देकर हिंडन विहार में लड़कियों के लिए स्कूल बनाने का प्रस्ताव सदन में सर्वसम्मति से पास किया। तत्कालीन महापौर तेलूराम कांबोज ने इस पर सहमति देते हुए निर्माण विभाग से एस्टीमेट पास कराकर निर्माण शुरू कराया। निर्माण विभाग ने स्कूल के निर्माण के लिए 85 लाख रुपये का एस्टिमेट बनाया, लेकिन निविदा कम दरों पर आई और 65 लाख रुपये की लागत से स्कूल बनकर तैयार हो गया। वर्ष 2018 में स्कूल की इमारत बनकर तैयार हो गई थी। इसमें नगर निगम द्वारा संचालित एमबी गर्ल्स स्कूल की शाखा संचालित की जानी थी। कक्षा छह से लेकर कक्षा 10 तक की बेटियां इस स्कूल में पढ़तीं। लेकिन नगर निगम के तत्कालीन अधिकारियों ने इस इमारत में स्कूल संचालित करने के बजाय इसे सीएंडडी वेस्ट का निस्तारण करने वाली कंपनी को सौंप दिया। अब वहां कंपनी का ऑफिस और डंपिंग ग्राउंड बना हुआ है जबकि आसपास के क्षेत्रों की बेटियों को पढ़ने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे स्कूल में जाना पड़ रहा है। नगर निगम ने स्कूल की इमारत निजी कंपनी को देने के बाद बेटियों के लिए दूसरी जगह स्कूल बनाने का आश्वासन दिया था। करीब तीन साल बीत गए, यह मामला स्थानीय लोगों की ओर से कई बार नगर निगम के अधिकारियों और मेयर के समक्ष उठाया जा चुका है, लेकिन वादा पूरा न हुआ। क्षेत्र की करीब डेढ़ लाख की आबादी अभी तक बेटियों के लिए स्कूल बनने का इंतजार कर रही है।
स्कूल बनने और कंपनी को देने का निर्णय मेरे कार्यकाल से पूर्व का है। क्षेत्रीय पार्षद की ओर से पूरे प्रकरण से अवगत कराया गया है। सदन की बैठक में इस मुद्दे को रखा जाएगा। सदन जैसा निर्णय लेगा, उसी के अनुरूप काम किया जाएगा। प्रयास है कि जल्द से जल्द बेटियों के लिए स्कूल संचालित करने की प्रक्रिया को शुरू किया जा सके। – महेंद्र सिंह तंवर, नगर आयुक्त