पुणे के कलेक्टर को अपना खून देकर करेंगे विरोध, पुणे के ऑटोवालों का अनोखा आंदोलन


  • सरकार से नाराज हैं पुणे शहर के रिक्शा चालक
  • पुणे के जिलाधिकारी को रिक्शाचालक आज देंगे खून से भरी शीशियां
  • फाइनेंस कंपनियों के अधिकारियों धमकियों और ज्यादतियों से परेशान हैं रिक्शा चालक
  • सोमवार को रिक्शा चालकों के यह अनोखा विरोध प्रदर्शन पुणे में किया जाएगा
पुणे। पुणे शहर के रिक्शा चालक सरकार की उदासीनता पर इस कदर निराश हो गए हैं कि अब वे अपना खून देकर सरकार को जगाना चाहते हैं। लोन पर लिए गए ऑटो रिक्शा की किस्त भरते-भरते रिक्शा चालक परेशान हो गए हैं। उनका कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से उनका धंधा लगभग खत्म सा हो गया है। लेकिन ईएमआई की किस्तें खत्म नहीं हो रही हैं और ना ही इनमें कोई रियायत मिल रही है। सरकार ने ऑटो रिक्शा चालकों के साथ बिल्कुल सौतेला व्यवहार किया है और अभी भी कर रही है। अपनी इस परेशानी को बताते हुए रिक्शा चालकों ने कहा कि सोमवार को भी पुणे के जिलाधिकारी को अपने खून से भरी शीशियां देंगे। शायद तब सरकार की नींद टूटेगी।
वसूली एजेंटों से परेशान हैं रिक्शाचालक
रिक्शा चालकों का कहना है कि जिन कंपनियों से उन्होंने लोन पर ऑटो रिक्शा लिए हैं। उनके अधिकारी उन्हें वक्त -बेवक्त दफ्तर बुलाते हैं। और फिर उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हैं उन्हें गालियां तक दी जाती हैं। इन सब बातों पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। कोरोना महामारी की वजह से ऑटोरिक्शा में ग्राहक बैठना पसंद नहीं कर रहे हैं। जिसकी वजह से परिवार चलाना मुश्किल है। ऐसे में लोन की किस्त कैसे भरें।
500 रिक्शाचालक करेंगे विरोध
सोमवार को तकरीबन 500 रिक्शाचालक खून से भरी शीशियां जिलाधिकारी को देंगे। पुणे के रिक्शा चालक संतोष नेवसकर बताते हैं कि उनकी आमदनी घटकर 300 प्रति दिन हो गई है। जिसकी वजह से उनकी घर की जरूरतें ही पूरी नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में सरकार को कुछ नियमावली बनानी चाहिए। ताकि फाइनेंस कंपनियां हमारे साथ ठीक से पेश आएं। इस विरोध में शामिल होने वाले दूसरे रिक्शा चालक विश्वेश्वर हीरेमठ का कहना है कि बिजनेस बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। और सरकार की तरफ से कोई भी मदद नहीं मिल पा रही है। बिना बैकग्राउंड जाने ही लोगों को परमिट दिए जा रहे हैं। जिसकी वजह से हम लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। फाइनेंस कंपनियों के अधिकारी जब हमें बुलाते हैं तो हमारे साथ गाली-गलौज की जाती है और धमकियां दी जाती हैं।