गाजियाबाद के इस इलाके में 2 विभागों के बीच 'मूंछ' की लड़ाई, नहीं जलती एक भी स्ट्रीट लाइट


  • गाजियाबाद के इस इलाके में 4 सोसायटियां, 3 हजार से ज्यादा लोग उनमें रहते हैं, लेकिन सड़क पर एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं
  • शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है.... लूट, अपहरण, हत्या, छेड़छाड़ की कई वारदात इस इलाके में हो चुकी हैं
  • हाउस टैक्स के लिए रेजिडेंट्स को नगर निगम नोटिस दे रहा है और सुविधाओं के लिए जीडीए की शरण में जाने के लिए कह रहे
गाजियाबाद ब्यूरो। यूपी में स्मार्ट सिटी गाजियाबाद की ये सड़क है। आसपास में यहां 4 सोसायटियां हैं। 3 हजार से ज्यादा लोग उनमें रहते हैं। लेकिन, सड़क पर एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं है। शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। लूट, अपहरण, हत्या, छेड़छाड़ की कई वारदात हो चुकी हैं। सड़कों पर यह अंधेरा 2 विभागों की मूंछ की लड़ाई की वजह से है। हाउस टैक्स के लिए रेजिडेंट्स को नगर निगम नोटिस दे रहा है और सुविधाओं के लिए जीडीए की शरण में जाने के लिए कह रहे। शाम होने के बाद तो महिलाएं घर से निकलने से भी डरती हैं। बावजूद इसके वीमेन सेफ्टी सेल भी खामोश है।
रेजिडेंट्स ने कई बार शिकायत की
राजनगर एक्सटेंशन में ऑफिसर्स सिटी, अजनारा इंटीग्रिटी, गौड़ कास्केड सोसायटी की सड़क पर एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं है। यहां से ब्रेव हार्ट सोसायटी की ओर आगे बढ़ने पर भी अंधेरा ही रहता है। इधर भी कहीं स्ट्रीट लाइट नहीं जलती है। वाहनों की लाइट से यहां रोशनी होती है। चारों सोसायटियों में 3 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। रेजिडेंट्स ने इसकी कई बार शिकायत की। नगर निगम में गए तो जीडीए में जाने के लिए कहा गया। जीडीए में शिकायत लेकर पहुंचे तो नगर निगम की जिम्मेदारी बताई गई। नगर निगम यहां हाउस टैक्स के लिए नोटिस भेज रहा है। लेकिन, सुविधाओं की जिम्मेदारी जीडीए की बता रहा। 
देर रात तक आते-जाते हैं लोग
सोसायटियों में रहने वाले कई लोग दिल्ली, नोएडा समेत दूसरे शहरों में नौकरी करते हैं। देर रात तक इनका घर आना-जाना होता है। अंधेरे की वजह से तो कई महिलाएं शाम होने के बाद घर के बाहर नहीं निकलतीं, लेकिन नौकरीपेशा लोगों को जान हथेली पर लेकर सफर करना पड़ता है। अपहरण, लूट, हत्या, छेड़छाड़ जैसी कई वारदात इस इलाके में हो चुकी है, फिर भी लाइट की व्यवस्था नहीं की जा रही है।
ऐसे कैसे पूरा करेंगे सीएम का सेफ सिटी प्रॉजेक्ट
सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गाजियाबाद को सेफ सिटी बनाने की तैयारी चल रही है। प्रदेश के 17 शहरों को इस प्रॉजेक्ट में शामिल किया गया है। 200 करोड़ रुपये इसके तहत खर्च करने का प्लान है।
इसके तहत स्ट्रीट लाइट, कैमरे, महिलाओं की सुरक्षा, पिंक टॉइलट आदि को प्राथमिकता में रखने का निर्देश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि स्ट्रीट लाइट का जब इंतजाम नहीं हो सका तो बाकी की सुविधाएं कैसे दे पाएंगे?
जीडीए और निगम की है जिम्मेदारी
राजनगर एक्सटेंशन प्राइवेट कॉलोनी है। इसमें मुख्य सड़क पर स्ट्रीट लाइट की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इंटरनल सड़कों की देखभाल की जिम्मेदारी जीडीए की है। जीडीए के अधिशाषी अभियंता अनिल कुमार का कहना है कि इंटरनल सड़कों पर स्ट्रीट लाइट जलती है। कभी कभार कुछ फॉल्ट आने पर दिक्कत आई होगी।
'शिकायत पर नहीं होती सुनवाई'
राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले प्रवेंद्र चौधरी का कहना है कि निगम के अधिकारी हाउस टैक्स का नोटिस भेजने में देरी नहीं करते, लेकिन सड़क और स्ट्रीट लाइट ठीक करवाने की शिकायत की जाती है तो ध्यान नहीं देते।
राजनगर एक्सटेंशन आरडब्ल्यूए प्रेजिडेंट गजेंद्र आर्य का कहना है कि कभी यहां पर सड़क खराब रहती है तो कभी स्ट्रीट लाइट। शिकायत करने पर सुनवाई भी नहीं होती है।
शिकायत के लिए जारी हुए हैं नंबर
स्ट्रीट लाइट की शिकायत के लिए नगर निगम ने हेल्पलाइन नंबर 8178016810 जारी किया है। यहां किसी भी कार्यदिवस में कॉल कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा हर जोन के प्रकाश निरीक्षक से भी शिकायत की जा सकती है।
- मोहन नगर, तरन्नुम नकववी, मोबाइल नंबर 8178016850
- सिटी जोन, प्रदीप कुमार, मोबाइल नंबर 8178016903
- विजय नगर, नरेश कुमार, मोबाइल नंबर 8178016849
- वसुंधरा, राज किशोर, मोबाइल नंबर 8178016902
- कविनगर, विश्वभर दयाल, मोबाइल नंबर 8178016851