गोरखपुर के चौरी-चौरा कांड ने हिला दी थी ब्रिटिश साम्राज्य की नींव, 22 पुलिसकर्मियों की गई थी जान


गोरखपुर। साल 1922 में गांधी जी ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सत्य और अहिंसा के दम पर स्वतंत्रा प्राप्ति के लिए एक विशाल जनांदोलन की शुरुआत की थी। अहिंसा की शपथ लेकर निकला जनांदोलन तत्कालीन सयुंक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) के गोरखपुर के चौरी-चौरा में हिंसक हो गया। पुलिसकर्मियों के एक अमानवीय कृत्य से आहत होकर प्रदर्शनकारी भीड़ उग्र हो गई और एक पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया। इसमें 22 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। इस घटना को इतिहास की पन्नो में चौरी-चौरा कांड के नाम से जाना जाता है। इस कांड के बाद ऐसा पहली बार हुआ था कि ब्रिटिश सरकार की नींव हिल गई थी।
आखिर आंदोलन ने क्यों लिया उग्र रूप
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ असहयोग की नीति अपनाते हुए गांधी जी ने एक विशाल जनांदोलन की शुरुआत की थी। इस आंदोलन को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जनता का विशेष समर्थन मिला था। यह आंदोलन देश के सभी प्रांतों में सफल साबित हो रही थी। असहयोग की नीति के साथ आगे बढ़ता हुआ यह जनांदोलन 4 फरवरी 1922 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत वर्तमान उत्तर प्रदेश के चौरी चौरा पहुंचा। यहां पुलिस ने आंदोलन में शामिल एक बड़े समूह को रोकते हुए लाठीचार्ज करना शुरू किया। पुलिस के इस कृत्य से आक्रोशित क्रांतिकारी इसकी जवाबी कार्रवाई में पुलिस के साथ भिड़ गए। उन्होंने एक पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया। इस घटना के बाद 22 पुलिसकर्मी और 3 नागरिकों की मौत हो गई थी। इतिहास के पन्नों में इस घटना को चौरी-चौरा कांड के नाम से जानते हैं।
अंग्रेजी हुकूमत की हिल गई थी नींव
इस हिंसक कृत्य से आहत हुए गांधीजी ने भले ही 12 फरवरी 1922 को बारदोली में कांग्रेस की बैठक में असहयोग आंदोलन को वापस लिया लेकिन क्रांतिकारियों के इस आक्रोश से ब्रिटिश सरकार की नींव हिल गई थी। दरअसल, गांधी जी के इस आंदोलन को विदेशी लेखक सफल मानते हैं। अमेरिकी लेखक लुई फिशर ने लिखा है कि असहयोग आंदोलन शांति की दृष्टि से नकारात्मक लेकिन प्रभाव की दृष्टि से बहुत सकारात्मक साबित हुआ। साल 1857 की क्रांति के बाद असहयोग आंदोलन ने अंग्रेजी राज्य की नींव हिला दी थी।